अजब गजब

वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बने हैं ये लोग, जानें आखिर क्या हुआ ऐसा

तुर्की में रहने वाले एक परिवार के पांच भाई-बहन वैज्ञानिकों के लिए भी अजूबा बने हुए हैं।
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Updated: 7 Oct 2018, 1:25 PM IST
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वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बने हैं ये लोग, जानें आखिर क्या हुआ ऐसा

नई दिल्ली: दुनियाभर में कई ऐसे इंसान हैं जिन्हें अलग—अलग तरीके की दुर्भल बीमारी है। डॉक्टर्स और वैज्ञानिक समय—समय पर ऐसी बीमारियों पर रिसर्च करते हैं। कुछ बीमारियों के बारे में तो जानकारी हो जाती है, लेकिन कुछ ऐसे भी रोग होते हैं, जो आजतक पहेली बने हुए हैं। कुछ ऐसी ही बीमारी से पीड़ित है तुर्की में रहने वाला एक परिवार। यह परिवार वैज्ञानिकों के लिए भी अजूबा बना हुआ है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह इनका चलने का तरीका है और इनका ज्यादा देर सीधे खड़े न हो पाना है। इस फैमिली का हर सदस्य चलने के लिए पैरों के साथ ही हाथों का भी सहारा लेता है। 2005 में जब से इनकी तलाश की गई, तब से ये दुनिया के साथ-साथ साइंटिस्ट्स के लिए भी एक अबूझ पहेली बना हुआ है।


हैती प्रॉविन्स के एक गांव में रहता है उलास परिवार। इस परिवार में पांच भाई-बहनों की उम्र करीब 22 से 38 साल के बीच है। इन पांचों भाई—बहनों को चलने—फिरने में दिक्क्त है। इनके लिए सीधे खड़े होना भी मुश्किल है, क्योंकि इनके घुटने और कोहनी हमेशा मुड़े रहते हैं। बहुत कम समय के लिए ही इन्हें ये सीधा कर पाते हैं। हालांकि, इन भाई-बहनों के मां—बाप की बिल्कुल सामान्य है। वहीं, इनके बाकी 14 भाई-बहन भी सामान्य इंसान की तरह चलते-फिरते हैं।

इन पांचों भाई—बहनों पर काफी रिसर्च किया गया। शुरुआती थ्योरीज में कहा गया कि उलास परिवार के लोगों की चाल-ढाल बंदर जैसे स्तनपायी जानवरों की तरह है, जो मानव विकास के पिछले चरण की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, बाद में अमेरिकन साइंटिस्ट ने दावा किया कि इन भाई-बहनों की चाल बहुत ही अप्रत्याशित और किसी दुर्लभ बीमारी की वजह से है।

इसके अलावा कुछ रिर्सचर्स का कहना है कि इनकी चाल वंशानुगत स्थिति की वजह से ऐसी है। ये सेरिबेलर हाइपोप्लासिया का कारण बनता है और इसमें बैलेंस बनाए रखने की क्षमता कम हो जाती है। मीडिया रिपोर्ट्रस के मुताबिक, तुर्की के एक बायोलॉजिस्ट ने दावा किया था ये सभी भाई—बहन उनर टैन सिंड्रोम से जूझ रहे हैं। साथ ही इन्हें ब्रेन डैमेज की भी समस्या है। उनका दावा था कि जो भी लोग इस सिंड्रोम से पीड़ित होते हैं, वो हाथ-पैर दोनों के सहारे चलते हैं। इनके बोलने की क्षमता और मानसिक विकास दोनों प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि ये परिवार उलट विकास (रिवर्स विकास) का उदाहरण नहीं हैं।

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