आमतौर पर रेल के डिब्बों पर 5 अंकों में एक कोड लिखा जाता है।
नई दिल्ली। भारत में यातायात के साधनों में रेलवे सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण परिवहन माना जाता है। भारतीय रेल में निम्न वर्ग से लेकर उच्च वर्ग के लोग सफर करते हैं। यही कारण है कि देश में रेल को लाइफ लाइन कहा जाता है। एक आंकड़े के मुताबिक भारत में औसतन करीब 2.5 करोड़ लोग रेल में प्रतिदिन सफर करते हैं। आपने और हमने भी भारतीय रेल में कई बार सफर किया होगा। रेल में सफर के दौरान हमें रेलवे स्टेशन या रेल के डिब्बों पर कई सारे कोड लिखे दिखते हैं। लेकिन ऐसा बहुत कम ही होता है कि हम उन्हें जानने के लिए उत्सुक होते हैं।
इसी कड़ी में आज हम आपके लिए रेल के डिब्बों पर लिखे कोड वाले नंबर को लेकर एक बेहद ही दिलचस्प स्टोरी लेकर आए हैं। जिसे पढ़ने के बाद आपको रेलवे के बारे में बेहद ही ज़रूरी जानकारी मिलेगी। रेल के डिब्बों पर लिखे गए कोड वाले नंबर के पीछे कई सारे राज़ छिपे होते हैं, जिसके बारे में आपको शायद ही पता होगा।
आमतौर पर रेल के डिब्बों पर 5 अंकों में एक कोड लिखा जाता है। इन 5 अंकों में भी 2 श्रेणी होती हैं, कहने का सीधा मतलब ये है कि 5 अंकों वाले कोड में शुरुआती 2 अंक रेल डिब्बे के निर्माण वर्ष की जानकारी देते हैं तो वहीं आखिरी के 3 अंक रेल डिब्बे की श्रेणी के बारे में बताते हैं। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए किसी रेल डिब्बे पर कोड 98337 लिखा है, तो इसका मतलब ये है कि इस डिब्बे का निर्माण साल 1998 में हुआ है। जबकि आखिरी के 3 अंक डिब्बे की श्रेणी के बारे में बताते हैं।
अब चलिए हम आपको आखिरी के तीन अंकों का पूरा खेल समझाते हैं। आखिरी के तीन अंकों में लिखी गई संख्या यदि 201 से 400 के बीच है तो समझिए वे स्लीपर क्लास के डिब्बे होंगे। ऐसे ही 401 से 600 तक की संख्या वाले डिब्बे जनरल क्लास की ओर इशारा करते हैं। डिब्बों पर लिखे गए 601 से 700 तक के नंबर जन शताब्दी ट्रेनों में होने वाली चेयरकार की ओर इशारा करते हैं। तो वहीं 701 से लेकर 800 तक के नंबर सिटिंग और लगेज के बारे में बताते हैं।
इसके साथ ही 001-025 नंबर प्रथम श्रेणी के डिब्बों के लिए निर्धारित किए गए हैं। 025-050 तक के नंबर प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी के साझा डिब्बों पर लिखे होते हैं। द्वितीय श्रेणी के डिब्बों पर 050-100 तक के नंबर लिखे होते हैं। तो वहीं थर्ड क्लास एसी डिब्बों पर 101-150 तक के नंबर अंकित किए जाते हैं।