कभी आपने सोचा है कि लिफ्ट में शीशे क्यों लगाए जाते हैं, इसके पीछे क्या कारण होगा?
नई दिल्ली। जैसा की आप जानते ही हैं भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य जितना छोटा होता जा रहा है उतना ही बिल्डिंगों की ऊंचाई बढ़ती जा रही है। गगनचुंबी इमारतों की कल्पना करते ही दिमाग में सबसे पहला सवाल दिमाग में आता है। बिल्डिंग में लिफ्ट की व्यवस्था होगी कि नहीं? क्योंकि बिना लिफ्ट के ये इमारतें पर्वत जैसी लगती हैं। लिफ्ट में घुसते ही आप कभी बाल संवारने लगते हैं कभी अपने चेहरे को टकटकी लगाते हुए देखते रहते हैं लेकिन कभी आपने सोचा है कि लिफ्ट में शीशे क्यों लगाए जाते हैं इसके पीछे क्या कारण होगा? कुछ ही दूरी तय करने में ऐसी क्या जरूरत पड़ी कि शीशा लगाया जाता है और शीशा नहीं भी लगेगा तो कौन सा फरक पड़ जाएगा।
आप हम यही सोचते हैं कि जितनी भव्य बिल्डिंग होती है उतनी ही शानदार लिफ्ट होती है। होगी भी क्यों न लिफ्ट बिल्डिंग की शान जो होती है जैसे ही दरवाजे खुलते हैं चमचाती हुई लिफ्ट का दरवाजा जैसे ही खुलता है तो सामने अपना ही चेहरा दिखता है, क्योंकि या तो लिफ्ट में शीशा लगा होता है या फिर ऐसी सफाई होती है कि अपना ही चेहरा दिखाई देने लगता है। आइए हम आपको बताते हैं कि की ऐसा क्यों किया जाता है। असल में, लिफ्ट के कई ऐसे मामले आए जिसमें लोगों को एकाएक ऊंचाई पर जाने में दिक्कतें होती थी। लिफ्ट कंपनियों ने मंथन किया तो पता चला कि लोगों को मनोवैज्ञानिक कारणों से परेशानियां होती हैं। लिहाजा बिजी रखने के लिए लिफ्टों में शीशे लगा दिए जाए। इसका कारण भी हैं, इंसान भले ही सुबह आंख खुलते ही लिफ्ट में घुसे या बिल्कुल तैयार होकर। शीशा सामने पड़ते ही कुछ न कुछ एक्टिविटी करने ही लगता है। ऐसे में डर से इंसान का ध्यान भटक जाता है।