डॉ. इगोर अशर्बेयली गरीब व असहाय बच्चों को शिक्षित करने का काम भी करते हैं।
डॉ. इगोर अशर्बेयली का जन्म 1963 में अजेब बैजानी परिवार में हुआ था। स्कूली पढ़ाई के दौरान ही वैज्ञानिक बनने का फैसला किया। फिजिक्स और अंतरिक्ष संबंधी जानकारियों को जानने और समझने में अधिक रुचि रखते थे। पढ़ाई के दौरान इन्हें जब भी रूस के साइंस सेंटर में जाने का मौका मिलता, वे वहां मौजूद विशेषज्ञों से आसमानी घटनाओं के बारे में जानकारी एकत्र करने में जुट जाते थे। जब स्कूल पहुंचते थे तो क्लास में उन घटनाओं से जुड़े सवालों को अपने शिक्षकों से पूछते थे। अंतरिक्ष में इनकी रुचि देख शिक्षकों ने इन्हें कंप्यूटर साइंस की जगह इंजीनियरिंग पढऩे की सलाह दी जिससे ये कामयाब हुए।
पहला स्पेस किंगडम होगा असग्रेडिया
जर्मनी की पौराणिक कथाओं में असग्रेडिया शब्द का जिक्र अंतरिक्ष शहर के रूप में किया है जिसे देवताओं का देश भी कहा गया है। बताया जाता है कि जब मनुष्य अपने सभी कर्मों से उब जाता है तो वह अंतरिक्ष में शांति की चाहत में जाता है। इसी आधार पर असग्रेडिया देश बनाने का फैसला किया जिसका मतलब ‘पीस इन स्पेस’ होता है। असग्रेडिया के लिए 200 देशों के लोगों को नागरिकता मिल चुकी है। संयुक्त राष्ट्र से देश का दर्जा मिलते ही एक हजार लोगों को स्पेश नेशन ले जाएंगे।
एक लाख लोगों को नागरिकता
असग्रेडिया के लिए दो सौ देशों के करीब तीन लाख लोगों ने आवेदन किया था। लेकिन संविधान मानने वाले सिर्फ एक लाख दस हजार लोग थे जिन्हें नागरिकता दी गई है। स्पेस नेशन की नागरिकता के लिए अठारह वर्ष से अधिक उम्र के लोग ही आवेदन कर सकते हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट में ये अमरीकी स्पेस एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों व इंजीनियरों की मदद भी ले रहे हैं।
अंतरिक्ष में राजशाही व्यवस्था
नागरिकता लेने वाले लोगों को राजशाही व्यवस्था के तहत रहना होगा। राजशाही व्यवस्था को कायम रखने के लिए स्पेस नेशन में हर पांच वर्ष में चुनाव कराए जाएंगे। टैक्स संबंधी व्यवस्था के लिए कानून बनाया जाएगा। इनका वादा है कि इस स्पेस नेशन में नागरिकों को किसी भी तरह से असुविधा का सामना न करना पड़े, इसका पूरा खयाल रखा जाएगा।
लैब में रहते हैं 20 घंटे
दुनिया का पहला स्पेस नेशन बनाने में जुटे डॉ. इगोर करीब बीस घंटे लैब में बिताते हैं। कंप्यूटर की मदद से अंतरिक्ष की हर बारीक जानकारी एकत्र करने के लिए लैब में कंप्यूटर पर लगातार काम करने से भी पीछे नहीं हटते। इनकी टीम में सैकड़ों वैज्ञानिक और खगोलशास्त्री हैं जो इनके ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने में मदद करते हैं। अंतरिक्ष की घटनाओं को ये बखूबी समझते हैं और पलभर में भविष्य का आकलन कर लेते हैं।
फिटनेस का पूरा ध्यान रखते
करीब सत्रह साल से स्पेस नेशन बनाने की तैयारी में जुटे डॉ. इगोर अपनी फिटनेस का भी पूरा ध्यान रखते हैं। सुबह वॉक व एक्सरसाइज करते हैं। खाने में पौष्टिक आहार लेते हैं जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहे। ब्रेन को एक्टिव रखने के लिए पजल्स और कंप्यूटर पर गेम्स खेलते हैं।
चर्चा में: दुनिया का पहला स्पेस नेशन किंगडम ऑफ स्पेस ‘असग्रेडिया’ बनाया है जो सैटेलाइट से अंतरिक्ष के आउटर स्पेस का चक्कर लगा वापस लौटा है। ये नैनोसैट सैटेलाइट नासा के वर्जिनिया स्थित स्पेस स्टेशन से छोड़ा गया था।
डॉ. इगोर ने स्टेट ऑयल एकेडमी से १९८५ में स्नातक और मास्टर्स के बाद कंप्यूटर सांइस में पीएचडी की। १९८८ में सोसियम नाम की सॉफ्टवेयर कंपनी खोली जिसके जनरल मैनेजर बने। इस कंंपनी में करीब दस हजार लोग काम करते हैं। दुनियाभर में इनकी इस कंपनी का कारोबार फैला हुआ है।