
sachin tendulkar
- मनोज जोशी, वरिष्ठ पत्रकार
क्या बीसीसीआई जाने-अनजाने सचिन की जर्सी के बहाने गावस्कर और कपिल देव को दरकिनार तो नहीं कर गया? क्रिकेट प्रशंसकों के दबाव में क्या आने वाले समय में विराट कोहली का जर्सी नम्बर 18 भी इसी तरह रिटायर कर दिया जाएगा?
इसमें दो राय नहीं कि सचिन तेंदुलकर सदी के महान खिलाड़ी हैं। उन्हें देश ने भारत रत्न से लेकर क्रिकेट के भगवान तक का दर्जा दिया है लेकिन, यह बात भी सच है कि कोई भी खिलाड़ी खेल से बड़ा नहीं हो सकता। ऐसे में एक खिलाड़ी के सम्मान में उसके जर्सी नम्बर को रिटायर करना कई सवाल खड़े करता है। जो खिलाड़ी बचपन से सचिन जैसा बनने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे और सचिन उनके प्रेरणास्रोत थे, उनके राष्ट्रीय टीम में जगह पाने के बाद सचिन की दस नम्बर की जर्सी को पाने की चाह उन्हें और अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती। फुटबॉल में एलेक्स फग्र्युसन ने मैनचेस्टर यूनाइटेड टीम में युवा क्रिस्टियानो रोनाल्डो को सात नंबर की जर्सी पहनने की सलाह इसलिए दी थी क्योंकि वह डेविड बेकहम के इस टीम से हटने की कमी को वे इस नम्बर की जर्सी से पूरा करना चाहते थे। और आज, रोनाल्डो का सात नम्बर भी बेकहम की जर्सी की ही तरह सुपर हिट हो गया है।
अच्छा होता कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले भारतीय खिलाड़ी को दस नम्बर की जर्सी देकर सम्मानित किया जाता। उस स्थिति में सचिन की दस नम्बर की जर्सी और भी चर्चा का विषय बनती। एक तरह से बीसीसीआई ने सचिन से प्रेरित होकर टीम में आये खिलाड़ी से उसका अधिकार छीन लिया है। हालांकि बोर्ड ने भी यह फैसला दबाव में आकर किया है क्योंकि अगर ऐसा न होता तो वह इसे अपना अनधिकृत फैसला न कहता। वैसे भारत में सुनील गावसकर व कपिलदेव भी सदी के महान खिलाडिय़ों में हैं।
गावस्कर सम्भवत: भारत के सबसे ज़्यादा टेस्ट बचाने वाले खिलाड़ी रहे और कपिलदेव गेंद और बल्ले से जलवा दिखाने वाले सबसे बड़े एंटरटेनर। कपिल ने उस समय टेस्ट क्रिकेट में 5000 रन पूरे किये जबकि कई बल्लेबाज नहीं कर पाये थे। क्या बीसीसीआई जाने-अनजाने सचिन की जर्सी के बहाने इन दोनों महान खिलाडिय़ों को दरकिनार करने के कृत्य में शामिल नहीं हो गया? अगर यह फैसला क्रिकेट प्रशंसकों के दबाव में लिया गया है तो क्या आने वाले समय में विराट कोहली का जर्सी नम्बर 18 भी इसी तरह रिटायर कर दिया जाएगा? विराट आज तीनों तरह के फॉर्मेट में 50 से अधिक का औसत रखने वाले दुनिया के इकलौते क्रिकेटर हैं।
आज एक पूरी पीढ़ी उनके जैसा बनना चाहती है। किसी खिलाड़ी के सम्मान में जर्सी नम्बर को रिटायर करना क्लब स्तर पर तो समझ में आता है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा होना भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। फीफा ने भी कभी ऐसा फैसला नहीं किया। हां, माराडोना के सम्मान में उनके इतालवी क्लब नेपोली ने ऐसा जरूर किया था। अगर कोई भी कदम उनकी मुम्बई इंडियंस टीम की ओर से उठाया गया होता तो बात समझ में आती।
Published on:
03 Dec 2017 09:55 am
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