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PODCAST : निर्मात्री भी आज दिशाहीन

जो माया आज तक सृष्टि का संचालन करती रही, उसका निर्माण-संस्कार-पोषण का विभाग छोटा होता जा रहा है। समाज टूट रहे हैं।

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Gulab Kothari Article : निर्मात्री भी आज दिशाहीन : समानता और सशक्तीकरण के नए वातावरण ने घर-घर में युद्ध का वातावरण बना दिया है। दोनों एक होने के स्थान पर दो बनकर ही घर में रहना चाहते हैं। तब एक-दूसरे के लिए कहां रहे? स्त्रियों का स्थायी जीवन का सपना टूटता जा रहा है। पश्चिम में छोटी-छोटी अवधि के लिए साथ रहते हैं और अलग हो जाते हैं। पुरुष ने भी विकसित देशों में मौन घोषणा कर दी है कि वह स्थायी रूप से किसी एक स्त्री के साथ नहीं रहेगा। यानी परिवार का निर्माण नहीं होगा।