
राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में इन दिनों पानी के लिए मारामारी और हाहाकार मचा हुआ है। लोग एक-एक बाल्टी पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। भूजल स्तर की बात करें तो रायपुर, धमतरी, बेमेतरा और बालोद जिला क्रिटिकल जोन में आते हैं यानी कि यहां भूजल पाताल में जा चुका है. वहीं, राजनांदगांव, दुर्ग, बस्तर व कोरबा समेत 14 जिले सेमी क्रिटिकल जोन में हैं यानी कि इन जिलों में भूजल का स्तर पाताल में जाने की कगार पर है।
राजधानी रायपुर गर्मी की शुरुआत होते ही गंभीर पेयजल संकट की स्थिति में पहुंच चुकी है। जल विभाग और विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स की मानें, तो भूजल स्तर 800 फीट तक गिर चुका है। राजधानी के 60 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्र के बोरवेल सूख चुके हैं। राजधानी के आम मोहल्लों से लेकर पॉश कॉलोनियों तक में पानी के लिए टैंकर दौड़ाए जा रहे हैं। प्रदेश के ग्रामीण और वनांचलों में तो गर्मी के दिनों में हालात बहुत ही खराब हो जाते हैं। कबीरधाम समेत सुदूर आदिवासी व ग्रामीण इलाकों में अभी से बूंद-बूंद पानी के लिए कई किलोमीटर का पथरीला सफर तय करना पड़ रहा है। यहां पर लोग झिरिया पर पेयजल के लिए निर्भर हो गए हैं।
यह बहुत ही विडंबना की बात है कि हम हर साल बहुत बड़ी आबादी को पानी भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब सभी को पानी उपलब्ध कराने के लिए सरकारों द्वारा बहुत सी योजनाएं चलाई जा रही हैं। जलसंकट के बीच थोड़ी-सी राहत देने वाली खबर बालोद जिले से मिली है। पीएचई विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में भूजल स्तर 27 मीटर पर था, जो अब बढ़कर 22 मीटर तक आ गया है। यह संभव हुआ है लोगों के जागरूक होने, शासन-प्रशासन द्वारा जलसंचय के विभिन्न प्रयासों और गर्मी में धान की बजाय दलहन-तिलहन की फसल लेने से। जलसंकट से युद्ध करना है तो हमें ही जलसंरक्षण के लिए आगे आना होगा। -अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
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Updated on:
24 Apr 2026 08:01 pm
Published on:
24 Apr 2026 08:00 pm
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