इंजीनियरिंग फाइनल ईयर में मैंने एयरफोर्स का एग्जाम एफकैट दिया था। उस वक्त महिलाकर्मियों के लिए देशभर में सिर्फ तीन ही वैकेंसी निकली थी
इंजीनियरिंग फाइनल ईयर में मैंने एयरफोर्स का एग्जाम एफकैट दिया था। उस वक्त महिलाकर्मियों के लिए देशभर में सिर्फ तीन ही वैकेंसी निकली थी। मैं बचपन से ही एयरफोर्स जॉइन करना चाहती थी और जैसे ही मई में एग्जाम खत्म हुआ, ऊंचाईयों को छूने का मेरा सपना भी पूरा हो गया।
यह कहना है इंडियन एयरफोर्स अहमदाबाद स्टेशन में फाइटर कंट्रोलर की जिम्मेदारी निभा रहीं जयपुर की प्रियंका राहर का। वाओ वुमन सीरीज के तहत पत्रिका प्लस से खास बात करते हुए प्रियंका ने बताया कि उनका काम एयरक्राफ्ट को ग्राउंड से कंट्रोल कर डायरेक्शन देना है। वे कई बार फाइटर प्लेन में इसी अनुभव के लिए बैठ चुकी हैं। ताकि पायलट की चुनौतियों को महसूस कर सकें। जल्द ही वे फ्लाइट लेफ्टिनेंट के तौर पर पदोन्नत होने जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि वे ईसीई ब्रांच २०१५ बैच पासआउट हैं। एयरफोर्स में जाने के लिए मैं बचपन से ही प्रिपेयर थी। आने वाली चुनौतियों के लिए मैंने खुद को कॉलेज लेवल तक आते-आते तैयार कर लिया था। स्कूल से कॉलेज तक बैडमिंटन, रनिंग और स्वीमिंग जैसे क्षेत्रों में मैडल जीतती गई तो कॉन्फिडेंस बढ़ता गया, इतना कि सबसे टफ माने जाने वाले फिजीकल टैस्ट को भी आसानी से पार कर लिया।
साइकोलॉजी टैस्ट में जहां मेंटल फिटनेस को जज किया जाता है वहीं फिजीकल में जम्पिंग, रनिंग, एब्स्टेकल जैसे टास्क एक मिनट में पूरे करने होते हैं। मैं अपनी मजबूती का श्रेय मां को देना चाहती हूं, जिन्होंने मुझे बचपन से ही एक स्ट्रॉन्ग गर्ल बनाया। मेरे पैरेंट्स ने कभी मुझे सपनों की उड़ान भरने से नहीं रोका। प्रियंका के पिता दयानंद राहर कस्टम ऑफिसर और मां इंदिरा हाउस वाइफ हैं।
कॉलेज से सीखा टीम वर्क
प्रियंका का कहना है कि जेईसीआरसी में इंजीनियरिंग के दौरान उन्होंने रोबोटिक्स के कई इवेंट्स में पार्टिसिपेट किया। टेक्निकल फेस्ट में टीम मेंबर के तौर पर उन्होंने रोबोट भी बनाए। इसके अलावा कई कल्चरल फेस्ट भी ऑर्गेनाइज करवाए जिससे लीडरशिप और टीम वर्क जैसे स्किल्स सीखने को मिले।
जिंदगी का टास्क
गल्र्स के लिए मैं कहना चाहती हूं कि अब लड़कियों के लिए बहुत मौके हैं और वे हर क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रही हैं। यदि आपके पास सिर्फ करने की भी इच्छा है तो आपके सपनों को पंख लगने से कोई नहीं रोक सकता। खुद को मजबूत बनाना जिंदगी का सबसे बड़ा टास्क है। जो इसमें सफल हो जाता है वही जीत जाता है। जल्द ही प्रियंका फ्लाइट लेफ्टिनेंट के तौर पर पदोन्नत होने जा रही हैं, जिसे लेकर वे बहुत ज्यादा उत्साहित हैं।
टफ ट्रेनिंग
एयरफोर्स में एक साल तक टफ ट्रेनिंग होती है। इस दौरान कई लोग हॉस्पिटल में एडमिट तक हो जाते हैं, लेकिन बचपन से ही पूरी तरह प्रिपेयर होने की वजह से मेरे साथ कभी एेसा नहीं हुआ।