
एक बार एक अध्यापक कक्षा में विद्यार्थियों को तितली की इल्ली के बारे में पढ़ा रहे थे। उन्होंने उनसे कहा कि यह इल्ली दो घंटे बाद तितली में बदल जाएगी लेकिन इसके लिए उन्हें अपने खोल से बाहर आने में संघर्ष करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जब वह इल्ली बाहर निकलने की कोशिश करें तो कोई भी उस इल्ली की मदद न करें। यह कहकर वे कक्षा से बाहर चले गए। सभी विद्यार्थियों ने उसे ध्यान से देखना शुरू कर दिया। दो घंटे बाद इल्ली ने बाहर निकलने की कोशिश शुरू कर दी। उसे इतना संघर्ष करते हुए देख एक छात्र को उस पर दया आ गई और उसने इल्ली की सहायता करनी शुरू कर दी। तभी अध्यापक कक्षा में आ गए और उसे रोक दिया।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाने का प्रयास किया कि यदि इल्ली ने बाहर आने में संघर्ष नहीं किया और बाहर आ गई तो यह मर जाएगी और इसके विपरीत यदि यह बिना सहायता के बाहर आई तो बच जाएगी। अपने खोल से बाहर आने के लिए जो संघर्ष करती है, वह तितली के पंखों को मजबूत करता है। इसी प्रकार तुम्हें भी जीवन में स्वयं संघर्ष करना चाहिए। संघर्ष ही जीवन में सफलता की कुंजी है। संघर्ष व्यक्ति के जीवन के व्यक्तित्व को निखारकर उसे मजबूत बनाता है।