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शनि जयंती 2026: अयोध्या, उज्जैन में होगा 23 लाख मंत्रों का महायज्ञ, 13 साल बाद लौटा है एक संयोग

Shani Jayanti 2026 : 16 मई 2026 को शनि जयंती पर 13 साल बाद दुर्लभ महासंयोग बन रहा है। अयोध्या और उज्जैन में 23 लाख मंत्रों का महायज्ञ, 8 प्रहर अभिषेक और विशेष शनि पूजा होगी। जानें शनि दोष से मुक्ति के उपाय, साढ़ेसाती का असर और घर बैठे पूजा में शामिल होने का तरीका।

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भारत

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Manoj Vashisth

May 08, 2026

Shani Jayanti 2026

Shani Jayanti 2026 : शनिवार को पीपल के नीचे दीया जलाते समय न करें यह एक गलती (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Shani Jayanti 2026 : क्या आपको कभी ऐसा महसूस हुआ है कि आप मेहनत तो जी-तोड़ कर रहे हैं, लेकिन नतीजे किसी कछुए की रफ्तार से आ रहे हैं? जैसे कोई अदृश्य दीवार आपके और आपकी सफलता के बीच खड़ी हो गई हो। अक्सर हम इसे किस्मत का खेल कहकर छोड़ देते हैं, लेकिन ज्योतिष की दुनिया में इसे शनि का प्रभाव कहा जाता है।

साल 2026 की शनि जयंती कोई साधारण तारीख नहीं है। इस बार 16 मई 2026 को एक ऐसा दुर्लभ संयोग (शनि जयंती का शनिवार के दिन पड़ना) बन रहा है जो पूरे 13 साल बाद लौट रहा है। आइए जानते हैं क्यों यह दिन आपकी जिंदगी की दिशा बदल सकता है।

शनि देव: डराने वाले विलेन नहीं, न्याय करने वाले जज हैं

अक्सर लोग शनि देव का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं, लेकिन सच तो यह है कि वह क्रूर नहीं, बल्कि कर्मफलदाता हैं।

जीवित और मृत्यु के बाद का हिसाब:

बहुत कम लोग जानते हैं कि शनि देव के भाई यमराज हैं। जहां यमराज मृत्यु के बाद आपके कर्मों का फैसला करते हैं, वहीं शनि देव आपको आपके जीते-जी सही रास्ते पर लाने और कर्मों का फल देने का काम करते हैं।

शनि की दृष्टि का रहस्य:

कथा है कि शनि देव की पत्नी के श्राप के कारण उनकी दृष्टि जिस पर पड़ती है, उसका विनाश हो जाता है। इसीलिए शनि देव हमेशा सर झुकाकर चलते हैं किसी को बर्बाद करने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को अपनी विनाशकारी दृष्टि से बचाने के लिए।

13 साल बाद का महा-शनिवार संयोग

शनि जयंती हमेशा ज्येष्ठ अमावस्या को होती है, लेकिन शनि जयंती का शनिवार के दिन पड़ना एक महासंयोग माना जाता है। 16 मई 2026 को यही दुर्लभ मौका आ रहा है।

खास बात: अगर आप साढ़ेसाती, ढैय्या या किसी भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, तो इस दिन की गई छोटी सी पूजा भी 13 गुना ज्यादा फल देगी।

उज्जैन का प्राचीन शनि मंदिर और राजा विक्रमादित्य का वचन

महाकाल की नगरी उज्जैन के शिप्रा तट (त्रिवेणी घाट) पर स्थित नवग्रह शनि मंदिर का इतिहास अद्भुत है। कहा जाता है कि जब राजा विक्रमादित्य की साढ़ेसाती खत्म हुई, तो उन्होंने इस मंदिर की स्थापना की थी।

दशा स्वरूप दर्शन: यहां शनि देव शिला रूप में नहीं, बल्कि दशा स्वरूप में विराजमान हैं।
चमत्कारी मान्यता: माना जाता है कि यहां दर्शन मात्र से व्यक्ति के आधे कष्ट तुरंत दूर हो जाते हैं।

2026 के विशेष अनुष्ठान: घर बैठे पाएं कृपा

इस शनि जयंती पर देश के बड़े मंदिरों में खास आयोजन हो रहे हैं:

उज्जैन और अयोध्या: यहां 23 लाख शनि मूल मंत्रों का जाप और महायज्ञ किया जाएगा।
8 प्रहर का अभिषेक: शनि देव का 8 लीटर तेल से हर पहर अभिषेक होगा।

डिजिटल भक्ति: अगर आप इन मंदिरों तक नहीं पहुंच सकते, तो श्री मंदिर जैसे ऐप के जरिए आप घर बैठे इन महायज्ञों में शामिल हो सकते हैं और शनि सुरक्षा बॉक्स भी मंगवा सकते हैं।

शनि दोष से मुक्ति के उपाय

हनुमान जी की शरण: रावण की कैद से शनि देव को हनुमान जी ने ही छुड़ाया था। इसलिए शनिवार को हनुमान चालीसा पढ़ने वालों को शनि देव कभी परेशान नहीं करते।

पीपल के नीचे दीया: पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं, लेकिन याद रखें—दीया जलाकर पीछे मुड़कर न देखें। पीछे मुड़कर देखने का मतलब है आप अपनी समस्याओं को वापस बुला रहे हैं।

तेल का अभिषेक: शनि देव के घावों पर हनुमान जी ने तेल लगाया था, तभी से तेल चढ़ाने की परंपरा है। यह उन्हें ठंडक पहुंचाता है और उनके क्रोध को शांत करता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।