11 साल की उम्र में ही कंप्यूटर पर गुजरता था आधा समय, 8वीं क्लास में हुए फेल और फिर बन गए...
11 साल की उम्र में ही कंप्यूटर पर गुजरता था आधा समय, 8वीं क्लास में हुए फेल और फिर बन गए...
त्रिशनित अरोड़ा का जन्म 1993 में पंजाब के लुधियाना में हुआ था। पिता प्राइवेट कंपनी में एकाउंट मैनेजर जबकि मां गृहिणी हैं। बचपन से ही इनका पढ़ाई में मन नहीं लगता था। हालांकि तकनीक से जुड़ी चीजों को देखने के बाद इनके पास सवालों की झड़ी होती थी। इनके सवालों को सुन माता-पिता कहते थे इन सवालों के जवाब तभी मिलेंगे जब पढ़ाई लिखाई करोगे। जैसे-तैसे सातवीं क्लास पास कर ली लेकिन आठवीं में पहुुंचते ही पढ़ाई में मन लगना बंद हो गया और फाइनल पेपर में फेल हो गए। रिजल्ट देख घर के लोग चिंतिंत थे लेकिन इन्हें कोई डर नहीं था। इनका मानना था कि अगर कुछ करना है तो पूरा मन उसी चीज में लगाना चाहिए जिसमें कामयाबी मिलनी तय है।
23 की उम्र में खोली फर्म, दुबई में ऑफिस
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के लिए इनके पास नौकरी के ऑफर आने लगे तब २३ साल की उम्र में २०१२ में खुद की फर्म ‘टीएसी सिक्योरिटी’ (सिक्योरिंग साइबर स्पेस सिक्योरिंग फ्यूचर) खोली। मौजूदा समय में देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अमूल को साइबर सुरक्षा मुहैया करा रहे हैं। इसके अलावा ये देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई), पंजाब पुलिस क्राइम ब्रांच समेत अन्य जांच एजेंसियों, साइबर सेल के अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर सिक्योरिटी की ट्रेनिंग दे चुके हैं। फिलहाल ये पंजाब पुलिस एकेडमी के आईटी एडवाइजर हैं। आईटी कंपनी आईबीएम को भी सपोर्ट करते हैं। टीएसी सिक्योरिटी के देश में तीन और दुबई में एक ऑफिस हैं।
2014 में देश के 65वें गणतंत्र दिवस पर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने इन्हें ‘स्टेट अवॉर्ड’ देकर सम्मानित किया था। 2013 में भाजपा नेता और पूर्व वित्तमंत्री रहे यशवंत सिन्हा के साथ गुजरात में हुई एक बिजनेस रिलेशन कॉन्फ्रेंस में मंच साझा किया था।
चर्चा में
हाल ही इनके जीवन से जुड़ी एक कहानी ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ फेसबुक पेज पर वायरल हुई जिसमें बताया है कि बचपन में पढ़ाई में मन नहीं लगता था और आठवीं क्लास में फेल हो गए थे। जबकि आज इन्हें पूरी दुनिया साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के नाम से जानती है। ये देश की बड़ी आईटी कंपनियों के साथ सीबीआई और दूसरी जांच एजेंसियों के टेक्नीकल एडवाइजर हैं।
ग्यारह साल की उम्र में माता-पिता ने इन्हें इनकी जिद्द की वजह से कंप्यूटर दिया था। कंप्यूटर मिलने के बाद ये घंटों उसमें व्यस्त रहने लगे जिससे पढ़ाई ठप हो गई और आठवीं में फेल हो गए। इसके बाद स्कूल न जाने का फैसला किया और ओपन स्कूलिंग से नौवीं व दसवीं की परीक्षा पास की।
एथिकल कंप्यूटर हैकिंग के एक्सपर्ट
आठवीं में फेल होने के बाद ये कंप्यूटर हैकिंग पर काम करने लगे और कुछ समय के भीतर ही महारथ हासिल कर ली। दुनिया के किसी कोने में बैठकर कंप्यूटर को हैक करना इनके लिए बहुत आसान है। हैकिंग के लिए इन्होंने कई मशहूर विदेशी हैकर्स की किताबें पढ़ी हैं। इनकी गिनती दुनिया के चुनिंदा एथिकल हैकर्स में होती है।
22 साल की उम्र में लिखी तीन किताबें
कंप्यूटर हैकिंग एक्सपर्ट होने के बाद हैकिंग पर किताब लिखनी शुरू की। 22 साल की उम्र में पहली बुक ‘हैकिंग टॉक’ लिखी। इसके बाद दूसरी बुक हैकिंग एरा और तीसरी बुक ‘हैकिंग विद स्मार्ट फोन्स’ लिखी जिसे दुनियाभर के कंप्यूटर इंजीनियर, साइंटिस्ट और हैकर्स ने पसंद किया।
क्लोनिंग में हर चूक पर रहती इनकी नजर
इन्हें एटीएम, क्रेडिट कार्ड या अन्य तरह से ऑनलाइन पैसे के लेनदेन में होने वाले फर्जीवाड़े या चेक क्लोनिंग को पकडऩे में महारथ हासिल है। पंजाब की एक कंपनी में पेमेंट को लेकर हुए फर्जीवाड़े को पकड़ा था जिसमें हैकर्स ने पैसा अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर लिया था। मामला खुलने के बाद आरोपी गिरफ्तारी हुए थे।
मैक्सिको में मनाया जाता है त्रिशनित डे
न्यू मैक्सिको सिटी के मेयर जेवियर गोनजेल्स ने २५ अगस्त २०१७ को इनके नाम पर त्रिशनित अरोड़ा डे मनाने का फैसला किया था। इस खास दिवस पर मैक्सिको के सांता-फे शहर में लोगों को डिजिटल दुनिया से जुड़ी हर तरह की जानकारी बताई जाती है।