
सिंगापुर में एक शख्स ने डीपफेक वीडियो (नकली वीडियो) के झांसे में आकर लगभग 4 करोड़ डॉलर (लगभग 38 करोड़ रुपये) गंवा दिए। अपराधियों ने एआई की मदद से सरकारी अधिकारियों जैसी आवाज और चेहरा बनाकर उस व्यक्ति को फंसाया। वो सोच रहा था कि असली अधिकारी बात कर रहे हैं, लेकिन सब नकली था। आखिरकार उसने अपना काफी पैसा गंवा दिया।
अलजजीरा ने एक्सपर्ट्स का हवाला देते हुए बताया कि पहले ऐसे फर्जी वीडियो बनाने के लिए बड़े स्टूडियो और एक्सपर्ट चाहिए होते थे। अब मोबाइल ऐप और फ्री टूल्स से कोई भी कुछ ही मिनट में किसी नेता या अधिकारी की आवाज और चेहरा चिपका सकता है।
रिसर्चर कहते हैं कि तकनीक इतनी आसान हो गई है कि आम अपराधी भी इसका इस्तेमाल करने लगे हैं। सिंगापुर वाला मामला इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। वहां पीड़ित को वीडियो कॉल पर अधिकारी दिखाकर बैंक अकाउंट से पैसा ट्रांसफर करवा लिया गया।
भारत में भी ऐसे मामले सामने आने लगे हैं। कोई मुख्यमंत्री या पुलिस अधिकारी बनकर कॉल करता है तो लोग आसानी से विश्वास कर लेते हैं। खासकर बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोग जल्दी फंस जाते हैं।
अपराधी पहले सोशल मीडिया से आवाज और फोटो इकट्ठा करते हैं, फिर नकली वीडियो बनाकर व्हाट्सऐप या वीडियो कॉल पर भेज देते हैं। पैसा ट्रांसफर कराने के बाद गायब हो जाते हैं।
किसी भी अधिकारी या पब्लिक फिगर से वीडियो कॉल आए तो तुरंत उस नंबर को ऑफिशियल वेबसाइट से चेक करें। पैसे ट्रांसफर करने से पहले किसी परिचित से बात करें।
बैंक से भी पूछ लें कि कोई सरकारी अधिकारी सीधे पैसे मांग सकता है या नहीं। ज्यादातर मामलों में असली अधिकारी कभी भी अचानक वीडियो कॉल करके पैसा नहीं मांगते। शक हो तो कॉल काट दें और खुद ऑफिशियल नंबर पर कॉल करें।
अलजजीरा ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि आने वाले समय में ये नकली वीडियो और आवाजें इतनी असली लगेंगी कि आम आदमी पहचान ही नहीं पाएगा। इसलिए सरकारों को भी सख्त कानून बनाने होंगे और लोगों को जागरूक करना होगा।
सिंगापुर वाले मामले से सबक लेना चाहिए। एक व्यक्ति का पूरा पैसा एक नकली वीडियो की वजह से चला गया। हालांकि, थोड़ी सतर्कता से करोड़ों रुपये बचाए जा सकते हैं।