कनाडा के तेल समृद्ध प्रांत अल्बर्टा ने ट्रंप प्रशासन के साथ मिलकर आजादी की मुहिम तेज कर दी है। 500 अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन और गुप्त बैठकों की खबरों के बीच पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिका को संप्रभुता का सम्मान करने की चेतावनी दी है। पढ़ें विभाजन की ओर बढ़ते कनाडा की पूरी रिपोर्ट।
कनाडा में खालिस्तानी अलगाववाद को पनाह दिया जाना भारत के लिए कितनी चिढ़ाने वाला अनुभव रहता होगा, अब कनाडा इसका 'फर्स्ट हैंड' अनुभव कर सकता है। कनाडा के तेल समृद्ध प्रांत अल्बर्टा को देश से अलग करने की मुहिम में तेजी देखी गई है। इसमें कनाडा के सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि इस अलगाववादी आंदोलन को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का सक्रिय समर्थन मिल रहा है। दरअसल, अल्बर्टा के 'अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट' (एपीपी) के नेताओं ने अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों के साथ हाल के दिनों तीन गुप्त बैठकें की हैं। साथ ही फरवरी 2026 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के साथ एक और बड़ी बैठक प्रस्तावित है। इतना ही नहीं, अलगाववादी समूह ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन मांगी है। यह पैसा अल्बर्टा की आजादी के बाद जरूरी प्रबंधन काम में इस्तेमाल होगा। अल्बर्टा के कानून के अनुसार प्रांत को जनमत संग्रह के लिए 177,732 हस्ताक्षरों की जरूरत होगी।
इस घटनाक्रम से ओटावा में हड़कंप है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि उनकी देश की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ ना किया जाए। उधर ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी ने इसे एपीपी नेताओं की ट्रंप प्रशासन से भेंट को 'राजद्रोह' करार दिया है। कनाडाई नेताओं का कहना है कि यह दूसरे देश से मिलकर देश तोड़ने की साजिश अनैतिक है। उधर, ट्रंप समर्थकों का कहना है कि अल्बर्टा अमेरिका का 51वां राज्य बनने की क्षमता रखता है। कनाडा के लिए विशेष चिंताजनक तथ्य यह है कि कनाडा का 85 फीसदी तेल उत्पादन इसी एक प्रांत में होता है।
अल्बर्टा अमेरिका के टैक्सास प्रांत जितना बड़ा है, जिसका क्षेत्रफल करीब 661,848 किमी है। कनाडा के पश्चिम स्थित इस प्रांत के लोग खुद को ओटावा की उदारवादी राजनीति से अलग मानते हैं। 1995 के क्यूबेक जनमत संग्रह के बाद अब अल्बर्टा कनाडा के लिए सबसे बड़ा संवैधानिक खतरा बन गया है। इस प्रांत का कहना है कि वह टैक्स ज्यादा देता है, लेकिन उसे बदले में कम मिलता है। साथ ही ओटावा की पर्यावरण नीतियों और कार्बन टैक्स से अल्बर्टा के तेल उद्योग को नुकसान हो रहा है। यहां के नेता अमेरिका के जरिए सीधी पाइपलाइन चाहते हैं ताकि संघीय सरकार का दखल खत्म हो।
अल्बर्टा की गवर्नर डेनियल स्मिथ खुलकर ट्रंप की तारीफ करती हैं। हाल ही में उन्होंने ट्रंप के निजी निवास 'मार-ए-लागो' का दौरा किया था। कनाडा के अन्य प्रांत ट्रंप की नीतियों के खिलाफ हैं, लेकिन स्मिथ उनके करीब हैं।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को कनाडा को धमकी दी है कि वे कनाडा में बने सभी विमानों का प्रमाणन रद्द कर रहे हैं। साथ ट्रंप ने किसी भी कनाडाई विमान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रंप ने कहा, वह ये कदम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि कनाडाई सरकार ने अमरीकी विमानन कंपनी गल्फस्ट्रीम जेट विमानों को प्रमाणित करने से इनकार कर दिया है।