इस देश में में राष्ट्रीय बिजली ग्रिड फेल होने से देशव्यापी ब्लैकआउट हुआ, जिससे 1.1 करोड़ लोग प्रभावित हुए। आर्थिक संकट, तेल की कमी और पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर इस समस्या के मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
क्यूबा देश लंबे समय से आर्थिक और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। हाल के वर्षों में यहां बिजली आपूर्ति लगातार अस्थिर बनी हुई है, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ती रही हैं। इसी बीच सोमवार को हवाना समेत पूरे देश में अचानक बिजली गुल होने से करीब 1.1 करोड़ लोग अंधेरे में डूब गए, जिसने हालात को और गंभीर बना दिया।
क्यूबा के ऊर्जा मंत्रालय ने जानकारी दी कि देश का राष्ट्रीय बिजली ग्रिड पूरी तरह ठप हो गया, जिसके चलते अचानक पूरे देश में सप्लाई बंद हो गई। इस बड़े पैमाने पर हुए ब्लैकआउट के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन शुरुआती संकेत तकनीकी खराबी और सिस्टम ओवरलोड की ओर इशारा करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर और रखरखाव की कमी इस तरह की घटनाओं को बढ़ा रही है। अधिकतर बिजली प्लांट दशकों पुराने हैं, जिनमें आधुनिक अपग्रेड नहीं हो पाया है।
क्यूबा की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर स्थिति में है और ऊर्जा क्षेत्र इसका सबसे बड़ा शिकार बना हुआ है। देश में तेल की भारी कमी है, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हो रही है। अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के कारण क्यूबा को अंतरराष्ट्रीय बाजार से पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि बिजली संयंत्रों को नियमित रूप से चलाना मुश्किल हो रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक ईंधन आपूर्ति स्थिर नहीं होगी, तब तक ऐसे ब्लैकआउट दोहराते रहेंगे।
बिजली गुल होने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी की सप्लाई बाधित हो गई है, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। छोटे व्यापार, दुकानें और उद्योग बंद होने से आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है। अस्पतालों और परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ा है, जिससे स्थिति और चिंताजनक हो गई है। सरकार ने आपातकालीन उपायों के तहत वैकल्पिक एनर्जी सोर्स और सीमित सप्लाई शुरू की है। रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार रात तक हवाना के करीब 5 प्रतिशत हिस्से में बिजली बहाल की गई, जिससे लगभग 42 हजार उपभोक्ताओं को राहत मिली, लेकिन देश का बड़ा हिस्सा अब भी अंधेरे में है।