
India New Zealand strategic partnership: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के बाद अब न्यूजीलैंड के दौरे पर हैं। यह यात्रा ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला न्यूजीलैंड दौरा है। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच कुल 18 समझौतों और संयुक्त घोषणाओं पर सहमति बनी। इसका अर्थ है कि रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृषि, व्यापार, सुरक्षा, खेल और संस्कृति समेत कई क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम करेंगे। इन निर्णयों से स्पष्ट है कि भारत और न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से आगे बढ़ते हुए रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और न्यूजीलैंड ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। अब दोनों देशों की सेनाएं समुद्री सुरक्षा, निगरानी और सूचनाओं के आदान-प्रदान में एक-दूसरे का सहयोग करेंगी। इसके अलावा संयुक्त सैन्य अभ्यास भी आयोजित किए जाएंगे। दोनों देशों ने हाइड्रोग्राफी और नॉटिकल कार्टोग्राफी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की है। आवश्यकता पड़ने पर दोनों देशों की नौसेनाएं एक-दूसरे को लॉजिस्टिक सहायता भी उपलब्ध करा सकेंगी।
पीएम मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग और मेरिटाइम न्यूजीलैंड के बीच जारी संवाद का स्वागत किया। इसका उद्देश्य नाविकों के दक्षता प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता को मजबूत करना है। दोनों देशों का मानना है कि इससे नाविकों की आवाजाही आसान होगी और समुद्री प्राधिकरणों के बीच सहयोग को नई मजबूती मिलेगी।
भारत और न्यूजीलैंड ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने का संकल्प लिया है। इसके लिए दोनों देशों के बीच एक संयुक्त वर्किंग ग्रुप गठित किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत आतंकवाद से जुड़ी सूचनाओं और खुफिया जानकारी का नियमित आदान-प्रदान किया जाएगा, ताकि दोनों देश सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी भारत और न्यूजीलैंड के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे। साथ ही भूकंप, सुनामी और तटीय आपदाओं जैसे जोखिमों को कम करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी सहमति बनी है।
भारत और न्यूजीलैंड ने कृषि और डेयरी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देश कृषि अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और बेहतर खेती के तौर-तरीकों का आदान-प्रदान करेंगे। इसके साथ ही कीवी फल उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी दोनों देशों ने रुचि दिखाई है। इस पहल के तहत भारतीय राज्यों नागालैंड और उत्तराखंड में कीवी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जहां किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
भारत और न्यूजीलैंड ने पर्यटन को बढ़ावा देने पर सहमति जताई है, ताकि दोनों देशों के बीच पर्यटकों का आवागमन बढ़ सके। खेल के क्षेत्र में भी दोनों देश प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन में मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा, न्यूजीलैंड गुजरात के लोथल में विकसित किए जा रहे नेशनल मैरिटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के विकास में सहयोग करेगा। साथ ही दोनों देशों ने कला, संस्कृति और साझा विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की है।
भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (करीब 35,000 करोड़ रुपये) तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य के जरिए दोनों देश व्यापारिक संबंधों को नई गति देने और आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में काम करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने पर्यटन संबंधी समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। साथ ही दोनों नेताओं ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच सीधी नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू करने के लिए एयरलाइंस को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया, ताकि पर्यटन, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को और बढ़ावा मिल सके।
कस्टम सहयोग के तहत दोनों देशों ने 2024 कस्टम सहयोग व्यवस्था के अंतर्गत 2025 ऑथराइज्ड इकोनॉमिक ऑपरेटर्स म्यूचुअल रिकग्निशन अरेंजमेंट को लागू करने पर सहमति जताई। इससे सीमा शुल्क प्रक्रियाएं सरल होंगी और भरोसेमंद व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
भारत और न्यूजीलैंड ने स्वच्छ ऊर्जा और जैव ईंधन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच अंटार्कटिका अनुसंधान, समुद्री विज्ञान, खाद्य प्रौद्योगिकी, छात्र आदान-प्रदान और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी कई नए समझौते हुए हैं। इन पहलों से नवाचार, ज्ञान के आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह रणनीतिक साझेदारी ऐसे समय में हुई है, जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन का बढ़ता प्रभाव और आक्रामक रुख वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, लॉजिस्टिक सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते समन्वय से उनकी रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे समुद्री सुरक्षा, मुक्त एवं सुरक्षित व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।