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भारत ने कह दिया साफ, पाकिस्तान को तब तक नहीं मिलेगा सिंधु नदी का पानी जब तक…

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को रद्द कर दिया था। इस मामले पर भारत का रुख साफ है और अब एक बार फिर यूएन में भारत ने अपना पक्ष दोहराया है।

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Mar 20, 2026
Indus river (Photo - ANI)

पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terrorist Attack) का बदला लेने के लिए भारत (India) ने पाकिस्तान (Pakistan) के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) लॉन्च करने से पहले ही 'वॉटर स्ट्राइक' कर दी थी। हम बात कर रहे हैं भारत की तरफ से सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) को रद्द करने की। भारत के इस फैसले से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा, क्योंकि सिंधु नदी कई पाकिस्तानी प्रांतों के लिए पानी का मुख्य स्त्रोत है। पाकिस्तान कई बार इस समझौते को फिर से बहाल करने के लिए गिड़गिड़ा चुका है, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। भारत का इस मामले पर रुख साफ है और अब एक बार फिर यूनाइटेड नेशन्स - यूएन (United Nations - UN) में भारत ने अपना पक्ष दोहराया है।

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पाकिस्तान को तब तक नहीं मिलेगा सिंधु नदी का पानी जब तक…

यूएन में जल विश्व जल दिवस (World Water Day) के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश (P Harish) ने सिंधु जल समझौते पर भारत के पक्ष को दोहराया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को सिंधु नदी का पानी तब तक नहीं मिलेगा जब तक वो आतंकी गतिविधियों को जारी रखेगा।

रद्द रहेगा सिंधु जल समझौता

हरीश ने कहा कि पाकिस्तान दुनियाभर में आतंकवाद का वैश्विक केंद्र है। ऐसे में जितने समय तक पाकिस्तान अपने तौर-तरीकों में सुधार नहीं कर लेता, उतने समय तक सिंधु जल समझौता रद्द रहेगा।

पाकिस्तान को सीखना चाहिए मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान

पाकिस्तान समय-समय पर भारत से सिंधु जल समझौते का सम्मान करने की गुहार लगाता है। हरीश ने इसका जवाब देते हुए कहा कि समझौतों/संधियों की पवित्रता की बात करने से पहले पाकिस्तान को मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान करना चाहिए।

आतंकवाद का त्याग करना होना

हरीश ने आगे कहा कि भारत हमेशा से एक ज़िम्मेदार देश रहा है, लेकिन ज़िम्मेदारी दोनों तरफ से होनी चाहिए। पाकिस्तान को अपनी राज्य नीति के साधन के रूप में आतंकवाद का बिना शर्त त्याग करना होगा, तभी दोनों देशों के बीच शांति होगी।

पाकिस्तान के लिए बड़ा आर्थिक झटका

सिंधु जल समझौता रद्द होना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है। सिंधु और इससे जुड़ी नदियाँ सिर्फ पाकिस्तानी जनजीवन के लिए ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी काफी ज़रूरी है। इसके अभाव में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है।

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