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‘आतंकियों को पनाह देने वाला माहौल खत्म करना जरूरी’, UN में भारत ने अफगानिस्तान का मुद्दा उठाया

Afghanistan Refugees: UN में भारत ने अफगानों की जबरन वापसी और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों का मुद्दा उठाया है। पार्वथनेनी हरीश ने आतंकियों को पनाह देने वाला माहौल खत्म करने की अपील की है।
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Sep 17, 2026
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश (फोटो - एएनआई)

India UN Afghanistan: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अफगानिस्तान से लौटने वाले लोगों की स्थिति और आतंकवादी संगठनों को मिल रहे सुरक्षित ठिकानों का मुद्दा उठाया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वाला माहौल खत्म करना जरूरी है। उन्होंने अफगानों की जबरन वापसी को लेकर भी चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की है।

30 लाख से ज्यादा अफगानों की वापसी का मुद्दा

पार्वथनेनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2025 में करीब 29 लाख अफगान वापस लौटे। वहीं, 22 अगस्त 2026 तक करीब 11.5 लाख और लोगों की वापसी हुई। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी जिन्हें जबरदस्ती वापस भेजा गया। उन्होंने कहा कि 30 लाख से ज्यादा लोगों की इस तरह जबरन वापसी न तो सुरक्षित है और न ही सम्मानजनक। ऐसे लोगों के पुनर्वास और उन्हें समाज में दोबारा शामिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद मिलनी चाहिए।

वापसी सुरक्षित और सम्मान के साथ हो

हरीश ने कहा कि अफगानों की वापसी अपनी इच्छा से, सुरक्षित तरीके से और सम्मान के साथ होनी चाहिए। उन्होंने बड़े स्तर पर मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत आवास, भोजन और जरूरी सामान उपलब्ध कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र और अफगान अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहा है। भारत ने हाल ही में अफगान शरणार्थी और पुनर्वास मंत्रालय को परिवारों के लिए टेंट भी दिए थे।

हरीश ने कहा कि अगर इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जबरन वापसी दुनिया के किसी दूसरे हिस्से में हुई होती, तो संयुक्त राष्ट्र में इस पर ज्यादा चर्चा होती और बड़े स्तर पर मानवीय सहायता की व्यवस्था की जाती। उन्होंने अफगानों के मामले में ऐसी स्थिति को चिंता का विषय बताया।

9/11 हमलों का भी किया जिक्र

भारत ने बैठक में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक प्रयासों और क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। हरीश ने 9/11 आतंकी हमलों से मिले सबक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 9/11 के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान का समर्थन किया था। लेकिन अल-कायदा के आतंकी नेटवर्क ने अफगानिस्तान से बाहर भी अपनी गतिविधियों का विस्तार किया।

हरीश ने कहा कि आतंकवादी संगठनों को सुरक्षित ठिकाने और उनके लिए अनुकूल माहौल नहीं मिलना चाहिए। ऐसे नेटवर्क को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर काम करना जरूरी है।

ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा नेताओं का जिक्र

हरीश ने 9/11 हमलों की साजिश से जुड़े अल-कायदा के नेताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने ओसामा बिन लादेन का उदाहरण देते हुए कहा कि वह लंबे समय तक छिपा रहा, लेकिन आखिरकार उसे खोजकर मार गिराया गया। उन्होंने ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर का जिक्र किया, जिसके तहत अमेरिकी अभियान में पाकिस्तान के एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन मारा गया था। हरीश ने 9/11 की साजिश से जुड़े खालिद शेख मोहम्मद, हाइजैकर सेल के समन्वयक रम्जी बिन अल-शिभ और अल-कायदा के वरिष्ठ सदस्य वलीद बिन अताश का भी उल्लेख किया।

आतंकियों को पनाह देने वालों पर कार्रवाई की अपील

भारत ने कहा कि आतंकवादी संगठनों को पनाह देने वाला माहौल खत्म करना जरूरी है। हरीश ने ऐसे नेटवर्क और उन्हें संरक्षण देने वाली व्यवस्था से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील की। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से साफ किया कि अफगानिस्तान में मानवीय संकट से निपटने के साथ-साथ क्षेत्र में आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ भी प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

Updated on:
17 Sept 2026 08:09 am
Published on:
17 Sept 2026 08:09 am
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