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सूर्य की सक्रियता बढ़ने पर ISRO ने 50 से अधिक सैटेलाइट पर निगरानी बढ़ाई, भारत अलर्ट मोड पर

तेज सोलर फ्लेयर के कारण अंतरिक्ष मौसम बिगड़ा है। ISRO ने सैटेलाइट अलर्ट जारी किया है। फिलहाल बड़ा खतरा नहीं, लेकिन निगरानी जारी है।

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Feb 05, 2026
सूर्य की सक्रियता बढ़ी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पिछले कुछ दिनों से सूर्य असाधारण रूप से सक्रिय दिखाई दे रहा है और लगातार तेज सोलर फ्लेयर दर्ज किए जा रहे हैं। दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां इस बदलते अंतरिक्ष मौसम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। इसी बीच 1 फरवरी 2026 को आया X8.1 श्रेणी का सोलर फ्लेयर 2026 का अब तक का सबसे शक्तिशाली विस्फोट माना जा रहा है, जिसके बाद भारत सहित कई देशों में संभावित रेडियो ब्लैकआउट को लेकर चेतावनी जारी की गई है।

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सूर्य तूफान और सोलर फ्लेयर की वजह

हालिया सोलर गतिविधि की शुरुआत सूर्य की सतह पर बने एक जटिल सनस्पॉट क्षेत्र एक्टिव रीजन 14366 से हुई। इस क्षेत्र में बीते सप्ताह के दौरान लगातार चार बेहद शक्तिशाली सोलर फ्लेयर फूटे, जिनमें X8.1 फ्लेयर सबसे तीव्र रहा। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अनुसार यह अक्टूबर 2024 के बाद का सबसे चमकीला सोलर फ्लेयर है। सूर्य हर लगभग ग्यारह साल में सोलर मैक्सिमा चरण से गुजरता है और मौजूदा गतिविधि इसी चक्र का हिस्सा मानी जा रही है।

ISRO की तैयारी और सैटेलाइट निगरानी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पुष्टि की है कि उसके 50 से अधिक ऑपरेशनल सैटेलाइट को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ISRO के टेलीमेट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC) के निदेशक अनिल कुमार के अनुसार रेडियो संचार में बाधा की आशंका बनी हुई है। ग्राउंड स्टेशन को अलर्ट कर दिया गया है और किसी भी तकनीकी गड़बड़ी से निपटने के लिए कंटिन्जेंसी प्लान लागू किए गए हैं ताकि संचार और नेविगेशन सेवाएं प्रभावित न हों।

पृथ्वी और भारत पर संभावित असर

इतनी तीव्र सोलर फ्लेयर से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा पृथ्वी के आयनोस्फियर को प्रभावित करती है। इसका सीधा असर हाई फ्रीक्वेंसी रेडियो संचार, जीपीएस नेविगेशन, सैटेलाइट पेलोड और पावर ग्रिड पर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार आम लोगों के लिए सीधा खतरा नहीं है, लेकिन ध्रुवीय क्षेत्रों में उड़ान भरने वाले विमानों और अंतरिक्ष संपत्तियों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।

Aditya-L1 और भविष्य की रणनीति

भारत की पहली सोलर ऑब्जर्वेटरी Aditya-L1 इस समय अहम भूमिका निभा रही है। पृथ्वी सूर्य एल1 बिंदु पर स्थित यह मिशन सोलर रेडिएशन और मैग्नेटिक फील्ड पर रियल टाइम डेटा दे रहा है। साथ ही भारत सरकार ने नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST) की घोषणा की है, जिससे भविष्य में सूर्य गतिविधियों की बेहतर समझ विकसित होगी। फिलहाल वैज्ञानिक मानते हैं कि विनाशकारी खतरा नहीं है, लेकिन सूर्य की अस्थिरता को देखते हुए सतर्कता बेहद जरूरी बनी हुई है।

Published on:
05 Feb 2026 12:42 pm
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