
JD Vance Iran Warning: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है। वेंस ने कहा कि ईरान से निपटने के लिए ट्रंप प्रशासन के पास कई विकल्प मौजूद हैं। इनमें आर्थिक, सैन्य, कूटनीतिक और गुप्त दबाव जैसे विकल्प शामिल हैं। उन्होंने साफ कहा कि जो कुछ भी किया जा सकता है। वेंस ने गुरुवार को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रशासन अपनी योजनाओं का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं करेगा। उनका कहना था कि ऐसा करने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले लेने की क्षमता सीमित हो सकती है।
वेंस ने कहा कि अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए कई अतिरिक्त साधन हैं। इनमें से कुछ का इस्तेमाल राष्ट्रपति करेंगे और कुछ का नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि आर्थिक दबाव, सैन्य दबाव, कूटनीतिक दबाव और गुप्त दबाव, सभी विकल्प खुले हैं। वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका आने वाले महीनों में ईरान के खिलाफ क्या कदम उठाएगा, इसका खुलासा नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में वॉशिंगटन को अपनी रणनीति में लचीलापन बनाए रखना जरूरी है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने अपने रुख को वैश्विक ऊर्जा संकट से भी जोड़ा। उन्होंने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। वेंस ने कहा कि अमेरिका की रणनीति का एक मकसद बड़े वैश्विक ऊर्जा संकट को रोकना भी है। उन्होंने वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा और तेल-गैस की सप्लाई जारी रखने के लिए अमेरिकी सैन्य प्रयासों का बचाव किया।
अमेरिका और ईरान के बीच करीब सात महीने से संघर्ष जारी है। फिलहाल इसके स्थायी समाधान के स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि यह संघर्ष ज्यादा लंबे समय तक नहीं चलेगा।
ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिकी सेना ने ईरान पर पिछली रात बहुत बड़ा हमला किया। उनके मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के नए सैन्य उपकरणों को निशाना बनाया गया। इनमें रडार और मिसाइल से जुड़े सिस्टम शामिल थे।
वेंस का बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' शुरू किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, इस अभियान का मकसद ईरान की प्रमुख आर्थिक आय के स्रोतों पर दबाव डालना है। इसमें तेल, शिपिंग, विमानन और डिजिटल संपत्तियां शामिल हैं।
अमेरिका का कहना है कि इस अभियान के जरिए ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क से दूर करने और उसकी सरकार तक पहुंचने वाले राजस्व स्रोतों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है। इस बीच, वेंस ने संकेत दिया है कि ईरान को लेकर अमेरिकी रणनीति सिर्फ आर्थिक या सैन्य दबाव तक सीमित नहीं रहेगी। जरूरत पड़ने पर कूटनीतिक और गुप्त दबाव समेत अन्य विकल्पों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।