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Nepal Flood : 500 इंजीनियरों का व्हाट्सएप ग्रुप बना डिजिटल लाइफलाइन, नेपाल की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में ऐसे मिल रही मदद

Nepal Flood WhatsApp Group Engineers: नेपाल में बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश के लिए 500 से अधिक इंजीनियरों का WhatsApp ग्रुप डिजिटल लाइफलाइन बन गया है। इंजीनियर सुरंगों के नक्शे और तकनीकी जानकारी साझा कर बचाव दल को मलबे के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचने में मदद कर रहे हैं।
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भारत

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kamlesh sharma

Sep 04, 2026

Nepal Flood

Nepal Flood: (Photo: IANS/MEA)

Nepal Flood Update : काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने के लिए राहत और बचाव अभियान जारी है। इस मुश्किल अभियान में अब एक 500 से ज्यादा इंजीनियरों और हाइड्रोपावर विशेषज्ञों का WhatsApp ग्रुप अहम भूमिका निभा रहा है। इंजीनियरों का यह ग्रुप सुरंगों के नक्शे, तकनीकी जानकारी और परियोजनाओं की संरचना से जुड़ी सूचनाएं तत्काल उपलब्ध कराकर बचाव दल की मदद कर रहा है।

बाढ़ से पहले इंजीनियरों ने यह व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, लेकिन आपदा के बाद यह एक तरह के रियल टाइम तकनीकी सहायता नेटवर्क में बदल गया। बाढ़ के पानी के साथ आए लाखों टन मिट्टी, चट्टानों और मलबे ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे में बचावकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि जमीन के नीचे सुरंगें आखिर कहां हैं और वहां तक किस रास्ते से पहुंचा जा सकता है।

'लेआउट ड्रॉइंग भेजिए' और मिनटों में मिली जानकारी

द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, इस ग्रुप की उपयोगिता का अंदाजा उस समय हुआ, जब एक सरकारी अधिकारी ने चिलिमे हाइड्रोपावर परियोजना की लेआउट ड्रॉइंग मांगी। इसके कुछ ही मिनटों में एक इंजीनियर ने परियोजना के नक्शे साझा कर दिए। इनमें पावरहाउस और सुरंगों तक पहुंचने के रास्तों की जानकारी थी। इससे बचाव दल को यह समझने में मदद मिली कि मलबा हटाने के लिए कहां खुदाई की जाए और सुरंग तक किस दिशा से पहुंचा जा सकता है।

आपदा के बाद इस ग्रुप में कई और इंजीनियरों तथा प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं की डिजाइन और संचालन से परिचित लोगों को जोड़ा गया। बचाव दल ने परियोजनाओं के पूर्व कर्मचारियों से भी मदद मांगी है, क्योंकि उन्हें जमीन के नीचे मौजूद सुरंगों के नेटवर्क की जानकारी है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये सुरंगें?

बचाव दल को उम्मीद है कि बाढ़ के दौरान कुछ कर्मचारी सुरंगों के भीतर सुरक्षित जगहों तक पहुंच गए होंगे और अभी भी जिंदा हो सकते हैं। इसी उम्मीद ने मलबे से भरी सुरंगों में तलाश जारी रखने का हौसला दिया है।

बाढ़ में घाटी में अनुमानित 22 लाख टन मिट्टी और मलबा जमा हो गया है। कई जगह सुरंगों के प्रवेश द्वार तक मलबे में दब गए हैं। इतना ही नहीं, बाढ़ और भूस्खलन ने जमीन की संरचना बदलने के साथ कुछ सुरंगों को भी आंशिक रूप से भर दिया है।

नेपाल सेना के प्रवक्ता राजा राम बस्नेत ने बताया कि स्थिति सामान्य रूप से बंद हुई सुरंग को खोलने से कहीं ज्यादा जटिल है। बाढ़ ने आसपास के इलाके और सुरंगों की संरचना को बदल दिया है तथा इनमें मिट्टी, पत्थर और मलबा भर गया है।

रसुवागढ़ी में 46 लोगों के फंसे होने की आशंका

रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्लांट में बचाव दल एक सुरंग के भीतर करीब 250 मीटर तक पहुंचने में सफल रहा, लेकिन आगे मलबे ने रास्ता रोक दिया। अधिकारियों को आशंका है कि एक चैंबर में 46 तक लोग फंसे हो सकते हैं। माना जा रहा है कि वहां मौजूद लोगों के पास भोजन और पानी तक पहुंच हो सकती है। बचाव दल दोबारा वहां पहुंचने की तैयारी कर रहा है। वहीं अपर त्रिशूली-3ए हाइड्रोपावर परियोजना में सुरंग के प्रवेश द्वार तक पहुंचने में बचाव दल को करीब छह दिन लग गए, क्योंकि पूरा रास्ता मलबे में दबा हुआ था। संभावित रूप से फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइप भी डाले गए हैं।