Ceasefire:अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद लेबनान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान का दावा है कि लेबनान में भी युद्धविराम लागू होगा, जबकि इजराइल ने साफ कर दिया है कि यह समझौता वहां के लिए बिल्कुल नहीं है।
Lebanon: अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के सीजफायर से दुनिया ने थोड़ी राहत तो ली है, लेकिन लेबनान को लेकर एक बड़ा विवाद पैदा हो गया है। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार इस पूरे संघर्ष विराम में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान और इजरायल के बयानों में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ पाकिस्तान कह रहा है कि शांति समझौता हर मोर्चे पर लागू होगा, वहीं इजरायल ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। इस असमंजस ने मध्य पूर्व की स्थिति को और उलझा दिया है। इस विवादित स्थिति पर चार प्रमुख देशों के मीडिया की रिपोर्टिंग भी अलग-अलग है।
पाकिस्तानी मीडिया: यहां की मीडिया पाकिस्तान की कूटनीतिक जीत का जश्न मना रही है। पाकिस्तानी प्रेस का दावा है कि यह सीजफायर "हर जगह" के लिए है, जिसका सीधा मतलब है कि लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और इजरायली सेना के बीच चल रहा हिंसक संघर्ष भी तत्काल प्रभाव से रुक जाएगा।
इजरायली मीडिया: इजरायल के प्रमुख अखबारों और न्यूज़ पोर्टल्स ने लेबनान में सीजफायर की बात को पूरी तरह नकार दिया है। इजरायली मीडिया के अनुसार, सेना का फोकस लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह के ठिकानों को नष्ट करने पर है और वहां किसी भी तरह की सैन्य ढील नहीं दी जाएगी।
लेबनानी मीडिया: लेबनान का मीडिया भारी असमंजस में है। वहां की जनता इस खबर से शांति की उम्मीद तो लगा रही है, लेकिन लगातार हो रहे इजरायली ड्रोन हमलों और सैन्य हलचल के कारण ज़मीनी हकीकत उन्हें डरा रही है।
ईरानी मीडिया: ईरान का प्रेस पाकिस्तानी दावों का समर्थन कर रहा है। वह इस सीजफायर को लेबनान सहित अपने पूरे 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' की सुरक्षा के रूप में पेश कर रहा है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सबसे पहले इस सीजफायर का ऐलान करते हुए दावा किया था कि लेबनान भी इसमें शामिल है।
@CMShehbaz (Shehbaz Sharif): "With the greatest humility, I am pleased to announce that the Islamic Republic of Iran and the United States of America, along with their allies, have agreed to an immediate ceasefire everywhere including Lebanon and elsewhere, EFFECTIVE IMMEDIATELY. I warmly welcome the..." ( मुझे अत्यंत विनम्रता के साथ, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि इस्लामी गणराज्य ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका, उनके सहयोगियों के साथ, लेबनान और अन्य जगहों सहित हर जगह तत्काल सीजफायर के लिए सहमत हो गए हैं, जो तत्काल प्रभाव से लागू है...)
शहबाज शरीफ के इस ट्वीट के कुछ घंटों बाद ही इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय (PMO) ने एक बयान जारी कर लेबनान के सीजफायर में शामिल होने की बात का पूरी तरह से खंडन कर दिया। इसे इजरायली अधिकारियों और मीडिया द्वारा एक्स पर व्यापक रूप से शेयर किया गया:
@IsraeliPM (Prime Minister of Israel / Official Statement): "Israel supports the US effort to ensure that Iran no longer poses a nuclear, missile and terror threat... The United States has told Israel that it is committed to achieving these goals... The two-week ceasefire does not include Lebanon." ( इजरायल अमेरिकी प्रयासों का समर्थन करता है ताकि ईरान परमाणु, मिसाइल और आतंकी खतरा न रहे... अमेरिका ने इजरायल को बताया है कि वह इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है... इस दो हफ्ते के सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं है।)
लेबनान के मुद्दे पर इजरायल का रिएक्शन बेहद सख्त है। इजरायली अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अमेरिका-ईरान के बीच हुआ सीजफायर केवल होर्मुज जलडमरूमध्य और सीधे ईरानी हमलों को रोकने तक सीमित है। इसका हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रहे इजरायल के उत्तरी मोर्चे के ऑपरेशन्स से कोई लेना-देना नहीं है। इजरायल किसी भी सूरत में अपनी सीमा पर हिजबुल्लाह को मजबूत होने का मौका नहीं देगा।
लेबनान पर इस भारी कन्फ्यूजन के बीच अब सबकी नज़रें आगामी कूटनीतिक कदमों पर टिकी हुई हैं। इस्लामाबाद में होने वाली अगली उच्च स्तरीय बातचीत में यह मुद्दा सबसे अहम होने वाला है। देखना यह होगा कि क्या पाकिस्तान अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ईरान के जरिये हिजबुल्लाह को शांत कर पाता है, या फिर इजराइल लेबनान में अपने हमले जारी रखकर इस सीजफायर की सीमाओं को स्पष्ट करेगा।
ज़मीनी हकीकत कूटनीतिक बयानों से बहुत अलग है। एक पहलू यह है कि भले ही कागजों पर सीजफायर की बात हो रही हो, लेकिन लेबनान बॉर्डर पर तनाव कम नहीं हुआ है। हिजबुल्लाह के लड़ाके पूरी तरह मुस्तैद हैं और इजरायली वायुसेना भी गश्त कर रही है। ऐसे में अगर लेबनान से एक भी रॉकेट फायर होता है, तो यह मध्यस्थता की सारी कोशिशों पर पानी फेर सकता है और नए सिरे से युद्ध भड़क सकता है।