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NRI special : पीएम मोदी और ऋषि सुनक की आपसी समझ से ब्रिटेन और भारत के रिश्ते मजबूत होंगे, जानिए कैसे

ब्रिटेन में भारतवंशी ऋषि सुनक के वर्ष 2022 में शपथग्रहण करने के बाद से ही ब्रिटिश श्वेत अश्वेत, दक्षिण एशियाई समुदाय, भारतवंशी प्रवासी और अप्रवासी भारतीय नागरिकों की उम्मीदों को पंख लग गए हैं ।

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Feb 28, 2024

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से मुलाकात कर चुके इंडियन नेशनल स्टूडेंट एसोसिएशन के लंदन ज़ोन अध्यक्ष (President of Indian National Student Association, London Zone) राजस्थान मूल के प्रवासी भारतीय रणजीतसिंह राठौड़ ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) की व्यापक सोच और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की अच्छी ट्यूनिंग भी एक कारक रही है। ब्रिटेन के भारतवंशी इस बात से खुश हैं कि ब्रिटिश और भारतीय नागरिकों के बीच संबंधों का एक पुल बन गया है। वे सोचते हैं कि सुनक (PM Rishi Sunak) का प्रधानमंत्री के साथ-साथ अर्थशास्त्री होना भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबद्ध प्रगाढ़ बनाने के लिए एक पुल बनाने का काम कर रहा है। इससे भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों की आशाएं जाग उठी हैं।

मोदी का सिद्धांत महत्वपूर्ण

राठौड़ ने कहा कि कि इसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 'लिव लोकल-थिंक ग्लोबल' सिद्धांत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा‌ रहा है। ध्यान रहे कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ अरसा पहले सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा की थी। दोनों ने ब्रिटेन और भारत के बीच एफटीए (Free Trade Agreement) पर अपना रुख भी रखा था। दरअसल एफटीए दो या अधिक देशों के बीच व्यापार की एक संधि है। यह ट्रेड बैरियर्स (व्यापार में बाधाएं) कम कर द्विपक्षीय या बहुपक्षीय अर्थव्यवस्था के संबंध में स्थिरता लाने की नीतियों के नियमों का संग्रह है ।

ब्रुनेल विश्वविदयालय लंदन के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष व उक्सब्रिज निर्वाचन क्षेत्र में कंजर्वेटिव पार्टी के उम्मीदवार रणजीतसिंह राठौड़ का मानना है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक का भारत के प्रधानमंत्री मोदी से इस विषय पर चर्चा करना इस बात का संकेत है कि वे दक्षिण एशियाई देशों में ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने को महत्व दे रहे हैं। वैसे ब्रिटेन में सुनक श्रम-पूंजी व्यवस्था में अधिक सुधार लाने पर विचार कर सकते हैं।

टैक्स नियमों और बैंक प्रणाली पर भी गौर

उन्होंने कहा कि फिलहाल ब्रिटेन की आंतरिक अर्थव्यवस्था में नई सरकार टैक्स नियमों और बैंक प्रणाली पर भी गौर कर नए आयाम स्थापित करने की पूरी संभावना रखती है, जिसमें ऋषि सुनक का वित्तीय और बैंकिंग अनुभव भी बहुत कारगर साबित होगा। साथ ही यूके भारत और दक्षिण एशियाई देशों से बड़े वाणिज्य आदान-प्रदान से भी नयी अर्थ-नीतियां तय कर सकता है ।

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