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NRI Special : पुराने समय में ही नहीं, इस समय भी है अरस्तु, जानिए कौंन हैं अरस्तु पंचारिया जिन्होंने विदेशों में फहराया भारत का परचम

आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस है। आज हम आपको भारत का नाम दुनिया भर में रोशन करने वाले एक युवा एनआरआई वैज्ञानिक के संघर्ष से सक्सेस तक की एक दिलचस्प स्टोरी बताने जा रहे हैं। उन्हें आज का अरस्तु और आइंस्टाइन माना जाता है। ये हैं अंग्रेजों की धरती पर हिंदुस्तान का नाम रोशन करने वाले साइंटिस्ट देव अरस्तु पंचारिया। संयुक्त राष्ट्र संघ व भारत सरकार के अनुबंध के तहत अब तक उनके नाम पांच सौ से अधिक वैज्ञानिक बौद्धिक संपदा दर्ज हैं। उनके कई रिसर्च अंतररष्ट्रीय विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

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Feb 28, 2024

विश्व-पटल पर विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावशाली योगदान के सबब देश के बौद्धिक प्रतिनिधि माने जाते हैं भारतवंशी वैज्ञानिक देव अरस्तु पंचारिया। ब्रिटेन की रॉयल फैमिली से संरक्षित कला, विनिर्माण और वाणिज्य प्रोत्साहन के लिए रॉयल सोसाइटी की ओर से निर्वाचित और इसके ब्रिटिश मुख्य परिषद् में नामांकन से सम्मानित हैं अरस्तु। रॉयल सोसाइटी की ओर से स्टीफन हॉकिंग, कार्ल मार्क्स, एडम स्मिथ, बेंजामिन फ्रैंकलिन व रामानुजन आदि भी इस सम्मान से नवाजे जा चुके हैं। खूबसूरत और प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी हैं साइंटिस्ट देव अरस्तु पंचारिया। हमने उनसे जानी उनके संघर्ष से सक्सेस तक की कहानी।

आधुनिक समय के अग्रिम बुद्धिजीवियों में गिने जाते
इतिहास में अरस्तु से आइंस्टाइन तक कई महान विचारक हुए, जिन्होंने समाज, विश्व और ब्रह्माण्ड को अपने-अपने समय में पुनर्परिभाषित किया और एक नई दिशा दिखाई । अगर हम इक्कीसवीं सदी की बात करें तो भारत के बौद्धिक प्रतिनिधि माने जाने वाले एक ऐसे ही भारतवंशी विचारक और वैज्ञानिक हैं देव अरस्तु पंचारिया, उन्होंने राजस्थान के बीकानेर में एक सुदूर गांव से अपना प्रारंभिक जीवन शुरू किया और आज आधुनिक समय के अग्रिम बुद्धिजीवियों में गिने जाते हैं ।

सैद्धांतिक भौतिक विज्ञान और गणित में दक्ष

वे वैज्ञानिक विशेषज्ञता सैद्धांतिक भौतिक विज्ञान और गणित में दक्ष होने के साथ ही एक दार्शनिक के तौर पर भी जाने जाते हैं। अरस्तु के विचार विभिन्न माध्यमों से करोड़ों लोगों तक आज पहुंचते हैं और प्रभाव बनाते हैं जिसके कारण उन्हें कई विश्व-स्तरीय मैगज़ीनों ओर माध्यमों ने सबसे प्रसिद्ध बुद्धिजीवियों में गिना है। ये सब प्राप्त करने वाले वे इतिहास के सबसे युवा वैज्ञानिकों और दार्शनिकों में शुमार किए जाते हैं।

छोटे से गांव से शिखर तक का सफर
अनगिनत शैक्षणिक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों में लेक्चर दे चुके देव अरस्तु के लिए सब कुछ इतना आसान भी नहीं था । एक छोटे से गाँव सींथल जहाँ कुल एक हज़ार घर भी नहीं है, वहां से आज विश्व के अग्रिम बौद्धिक स्थानों और लोगों के बीच अपनी पहचान करना और एक मेगास्टार की तरह प्रशंसकों का हुजूम होना खुशी की बात है, लेकिन शायद सुनने या पढ़ने में जितना सरल है, ऐसा कर पाना उतना ही मुश्किल है।

अंदाज खूबसूरत और प्रभावशाली

आम तौर पर लोगों को साइंस की बातें बोर करती हैं, लेकिन देव अरस्तु के बोलने और समझाने का अंदाज इतना खूबसूरत दिलचस्प और प्रभावशाली है कि सुनने वाले को बहुत इंटरेस्ट आता है और वह सम्मोहित सा हो जाता है।

करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत
एक तरफ आज हमारे देश का युवा, जिसके पास संसाधनों कि कोई कमी नहीं है, अक्सर खुद को हालात से हारा हुआ महसूस करता है, वहीँ दूसरी ओर भारत से एक ऐसे विश्व-स्तरीय व्यक्तित्व का होना कहीं न कहीं उन करोड़ों युवाओं का प्रेरणास्रोत है ,जो अपने जीवन में रौशनी की एक किरण ढूँढते हैं।

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Published on:
28 Feb 2024 01:08 pm
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