
चीन (China) और ताइवान (Taiwan) के बीच पिछले कई सालों से चल रही टेंशन की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। चीन के ताइवान पर अपना हक जताने और ताइवान के खुद को एक स्वतंत्र देश मानने और कई देशों के भी ताइवान को स्वतंत्र देश मानने की वजह से दोनों देशों के बीच टेंशन की स्थिति बनी हुई है और यह जगजाहिर भी है। पिछले कुछ समय से चीन ने ताइवान बॉर्डर के पास युद्धाभ्यास बढ़ा दिया है। यह देखते हुए ताइवान ने कंपल्सरी मिलिट्री सर्विस की अवधि को बढ़ाकर एक साल करने का फैसला लिया गया है। हाल ही में अमरीका (United States of America) ने भी इस बारे में एक बड़ा कदम उठाया है।
क्या है अमरीका का कदम?
अमरीका ने हाल ही में ताइवान की मदद के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अमरीका के स्टेट डिपार्टमेंट ने वॉलकैनो एंटी-टैंक माइन लेयिंग सिस्टम्स (Volcano anti-tank mine laying system) की बिक्री को मंज़ूरी दे दी है। इन सिस्टम्स की कीमत करीब 180 डॉलर्स होगी।
चीन की बढ़ सकती है टेंशन
अमरीका द्वारा ताइवान को वॉलकैनो एंटी-टैंक माइन लेयिंग सिस्टम्स देने से चीन की टेंशन बढ़ सकती है। अमरीका समय-समय पर ताइवान को समर्थन करता रहता है। ऐसे में इस हथियार से ताइवान की चीन की गतिविधियों के खिलाफ तैयारियाँ और भी मज़बूत होंगी।
समय-समय पर अमरीका ने किया ताइवान का समर्थन
अमरीका समय-समय पर चीन की ताइवान के खिलाफ नीतियों का विरोध करते हुए ताइवान का समर्थन करता रहा है। इसी साल 2 अगस्त को ताइवान के लिए समर्थन दिखाते हुए तत्कालीन यूनाइटेड स्टेट्स हाउस ऑफ रिप्रेसेंटेटिव्स की स्पीकर नैंसी पेलोसी (Nancy Pelosi) हवाई यात्रा करते हुए ताइवान पहुँची थी। साथ ही अमरीका युद्ध होने की स्थिति में भी ताइवान को समर्थन देने के लिए तैयार है।
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