
डोनाल्ड ट्रंप (File Photo)
अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट (Defense Production Act) को फिर से लागू कर दिया है। इस एक्ट के तहत अमेरिका में हथियारों, गोला-बारूद के प्रोडक्शन को बढ़ाया जाएगा, जिसके लिए डिफेंस कंपनियों को भी ज़रूरी निर्देश दे दिए गए हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान के खिलाफ युद्ध (War Against Iran) की वजह से अमेरिकी हथियारों के भंडार काफी कम हो गए हैं और इसी बात को ध्यान में रखते हुए ट्रंप ने यह फैसला लिया।
ट्रंप का मानना है कि अमेरिका में हथियारों के भंडार का कम होना देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। इसी वजह से वह हथियारों का प्रोडक्शन बढ़ाना ज़रूरी मानते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच 14-सूत्रीय शांति समझौता हो गया है। इसके तहत दोनों देशों में कई मुद्दों पर सहमति बन गई है और अब युद्ध का नहीं, बल्कि डिप्लोमेसी का रास्ता अपनाया जाएगा। हालांकि हैरान करने वाली बात यह है कि जो ट्रंप पहले ईरान को खत्म करने की धमकी देने से पीछे नहीं हट रहे थे, वह पिछले कुछ हफ्तों से खुद शांति समझौते को ज़रूरी बता रहे थे और इसमें किसी तरह की परेशानी न आए, इसके लिए उन्होंने इज़रायल (Israel) के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) को भी फटकार लगा दी थी।
ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका ने बड़े लेवल पर हमले किए, जिनमें कई मिसाइलों, बम, डिफेंस सिस्टम्स, इंटरसेप्टर्स और अन्य हथियारों का इस्तेमाल हुआ। इस दौरान अमेरिका ने इज़रायल को भी हथियार मुहैया कराए और रूस (Russia) के खिलाफ मदद के लिए यूक्रेन (Ukraine) को भी हथियारों की सप्लाई की। इसका सीधे तौर पर असर अमेरिकी हथियारों के भंडार पर पड़ा। अगर ईरान के खिलाफ युद्ध और लंबा चलता, तो अमेरिका के लिए काफी मुश्किल खड़ी हो जाती। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध इस वजह से खत्म लिया क्योंकि उनके पास हथियार कम पड़ गए?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध की वजह से कम हुए अमेरिकी हथियारों के भंडार को फिर से भरने के लिए युद्ध स्तर पर इनका प्रोडक्शन बढ़ाना होगा। फिर भी हथियारों की कमी को पूरा करने में 2-4 या फिर 5 साल भी लग सकते हैं। इतना ही नहीं, इसके लिए पानी की तरह पैसा बहाना पड़ेगा।
डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट 1950 अमेरिका का एक अहम कानून है, जो कोरियाई युद्ध के दौरान सितंबर 1950 में लागू किया गया। यह राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा की ज़रूरतों के लिए प्राइवेट कंपनियों को निर्देशित करने का अधिकार देता है। टाइटल-I के अनुसार राष्ट्रपति को यह अधिकार होता है कि वह कुछ खास सामानों जैसे हथियारों को अहम और रणनीतिक मानते हुए प्राइवेट कंपनियों को इन सामानों के लिए कॉन्ट्रैक्ट स्वीकार करने और उन्हें प्राथमिकता देने का निर्देश दें। टाइटल-III के अनुसार राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए हथियार जैसे सामानों और सेवाओं की सप्लाई की व्यवस्था के लिए ज़रूरी नियम, आदेश या एजेंसियाँ बनाने का अधिकार होता है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ज़रूरी घरेलू औद्योगिक क्षमता को बनाने, बनाए रखने, सुरक्षित करने और बढ़ाने वाली कंपनियों को ग्रांट, लोन और खरीद के वादे देना शामिल है। टाइटल-VII के अनुसार राष्ट्रपति को सामान्य अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने का अधिकार होता है जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रयासों के लिए ज़रूरी कम और अहम सामान सुरक्षा की ज़रूरतों के लिए उपलब्ध हो सकें।
Updated on:
18 Jun 2026 09:16 am
Published on:
18 Jun 2026 08:54 am
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