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ईरान के खिलाफ युद्ध का अमेरिकियों की जेब पर पड़ रहा असर, 4 साल में सबसे ज़्यादा बढ़ी महंगाई

Iran War Impact: ईरान के खिलाफ युद्ध में सीज़फायर चल रहा है, लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है। युद्ध के खत्म होने के बाद भी इसका असर अमेरिकियों की जेब पर पड़ रहा है। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।

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May 13, 2026
Inflation in US

अमेरिका (United States of America) और ईरान (Iran) के बीच सीज़फायर के दौरान भी तनाव बरकरार है। अमेरिका ने ईरान को जो 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा था, उस पर ईरान ने अपना प्रस्ताव भेजा, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अस्वीकार्य और कचरा बता चुके हैं। ट्रंप का मानना है कि ईरान से सीज़फायर लाइफ सपोर्ट पर है। हालांकि वह फिर से युद्ध के पक्ष में नहीं हैं लेकिन यह साफ कर चुके हैं की अगर ज़रूरत पड़ी, तो ईरान पर फिर से हमले करने से पीछे नहीं हटेंगे। ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका को आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसका असर अमेरिकियों पर पड़ रहा है।

4 साल में सबसे ज़्यादा बढ़ी महंगाई

ईरान के खिलाफ युद्ध का असर अमेरिका में बढ़ी महंगाई के रूप में दिख रहा है। अमेरिकी ब्यूरो ऑफ़ लेबर स्टैटिस्टिक्स की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में अमेरिका में किराने के सामान की कीमतों में 0.7% की बढ़ोतरी हुई, जो करीब 4 साल के दौरान एक महीने में हुई सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार कीमतों में यह उछाल उन चेतावनियों की पुष्टि करता है कि ईरान के साथ युद्ध के कारण अमेरिकियों के लिए खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें बढ़ रही हैं।

सालाना आधार पर ताज़ी सब्ज़ियों की कीमतें तीन महीने पहले की तुलना में 44% से भी ज़्यादा बढ़ गई हैं। इसी दौरान ब्रेड और दूध जैसे अन्य ज़रूरी सामानों की कीमतों में 8% और 5% की बढ़ोतरी देखी गई है। इस बीच कॉफी और बीफ की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। पिछले तीन महीने में अमेरिका में किराने की दुकानों पर मिलने वाली कॉफी की कीमत में 22% से भी ज़्यादा की सालाना दर से बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में भी तेज़ी से इजाफा देखने को मिला है।

जनता है नाराज़

अमेरिका में बढ़ती महंगाई से जनता काफी नाराज़ है और ट्रंप को यह बात अच्छी तरह से पता है। जिन लोगों ने ट्रंप को वोट दिया था वो भी अब उनसे नाराज़ हैं। अपने राष्ट्रपति अभियान के दौरान ट्रंप ने कहा था कि वह देश में महंगाई नहीं बढ़ने देंगे, लेकिन अब उन्हें इसकी परवाह नहीं है। हालांकि इसकी कीमत उन्हें और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव में चुकानी पड़ सकती है।

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