
Donald Trump Iran War Update: ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी जंग अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंचती दिख रही है, जहां सैन्य कार्रवाई के साथ कूटनीति की हलचल भी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि संघर्ष अपने अंतिम दौर की ओर बढ़ रहा है और तेहरान समझौते की इच्छा रखता है। हालांकि, इसी दौरान यमन के हूतियों के हमले और सऊदी अरब की ऊर्जा व्यवस्था पर चोट ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और गंभीर बना दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब खत्म होने की दिशा में बढ़ रहा है। ट्रंप के मुताबिक, तेहरान समझौता करना चाहता है और दोनों पक्षों के बीच संपर्क भी हुआ है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में संकेत दिया कि अमेरिका बातचीत के विकल्प को खुला रखे हुए है।
हालांकि, इस दावे के बीच ईरान की ओर से प्रत्यक्ष बातचीत को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। इससे पहले तेहरान ने अमेरिकी संपर्क के दावों पर अलग रुख अपनाया था और ओमान की मध्यस्थ भूमिका पर जोर दिया था।
संघर्ष के बीच खाड़ी क्षेत्र में हालात सामान्य होने के बजाय कई मोर्चों पर बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब की ओर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। वहीं सऊदी नेतृत्व वाले बलों ने यमन में जवाबी कार्रवाई की है। Reuters के अनुसार, हूतियों ने लाल सागर के पास रणनीतिक इलाकों में भी अपनी पकड़ मजबूत की है।
इस घटनाक्रम ने अमेरिका-ईरान संघर्ष को केवल दो देशों के बीच सीमित रहने वाली लड़ाई नहीं रहने दिया है। खाड़ी की सुरक्षा, लाल सागर में जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति अब इस संकट के अहम हिस्से बन चुके हैं।
सऊदी अरब की करीब 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद इसे अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। यह पाइपलाइन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिए सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं को दरकिनार कर लाल सागर के रास्ते तेल भेज सकता है।
यही वजह है कि इस संघर्ष का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। तेल की आपूर्ति बाधित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना हुआ है। यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा व्यापार मार्गों में शामिल है और यहां लंबे समय तक यातायात बाधित रहने से तेल तथा गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
जून में हुए समझौते के बाद लड़ाई रोकने और स्थायी समाधान के लिए बातचीत की समयसीमा तय हुई थी, लेकिन अगस्त में वह व्यवस्था समाप्त हो गई और सैन्य तनाव फिर बढ़ गया।
अब ट्रंप के ताजा दावे ने कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन हूती हमलों, ऊर्जा मार्गों पर खतरे और होर्मुज की स्थिति को देखते हुए आगे की राह अभी भी बेहद जटिल बनी हुई है।