
Lindsey Graham Death: अमेरिका के वरिष्ठ रिपब्लिकन नेता और दक्षिण कैरोलिना से सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया। 71 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके कार्यालय ने रविवार को बयान जारी किया। कार्यालय ने कहा कि ग्राहम का शनिवार शाम संक्षिप्त और अचानक हुई बीमारी के बाद निधन हो गया। बता दें कि लिंडसे ग्राहम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे। उन्होंने हाल ही में अमेरिकी सीनेट के लिए अपना लगातार पांचवां कार्यकाल जीता था।
एक्स पर पोस्ट करते हुए ग्राहम के कार्यालय ने अपने बयान में कहा कि सीनेटर ग्राहम के परिवार ने इस कठिन समय में लोगों से प्रार्थना करने की अपील की है और निजी जीवन की गोपनीयता बनाए रखने का अनुरोध किया है।
बता दें कि रिपब्लिकन पार्टी के नेता ग्राहम पहली बार साल 2002 में अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए थे। इसके बाद 2008, 2014 और 2020 में भी उन्होंने लगातार जीत दर्ज की।
इसके अलावा 2008 के आम चुनाव में ग्राहम ने 10 लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी, जो कि अपने राज्य में ऐसा करने वाले पहले नेता बने।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह अपने परिवार के पहले सदस्य थे जिन्होंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना से स्नातक और कानून की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद लगभग छह वर्षों तक अमेरिकी वायुसेना (US Air Force) में सैन्य वकील (Judge Advocate) के रूप में सेवा दी।
वहीं 1989 में सैन्य सेवा छोड़ दी, इसके बाद उन्होंने साउथ कैरोलिना एयर नेशनल गार्ड** में सेवा जारी रखी। वर्ष 1994 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने जाने तक वह इस पद पर रहे।
1994 में ग्राहम दक्षिण कैरोलिना के तीसरे संसदीय जिले से 1877 के बाद वॉशिंगटन पहुंचने वाले पहले रिपब्लिकन सांसद बने थे।
बता दें कि ग्राहम की गिनती डोनाल्ड ट्रंप के सबसे करीबियों में होती थी। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में लिंडसे ग्राहम विदेश नीति के सबसे प्रभावशाली रिपब्लिकन नेताओं में शामिल थे। वह लंबे समय से ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के पक्षधर रहे और वॉशिंगटन-तेहरान के बीच सीधे टकराव की वकालत करते रहे।
डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और सीनेटर ग्राहम ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए ईरान परमाणु समझौते का भी खुलकर विरोध किया था।
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए हुए समझौते को लेकर भी उन्होंने सतर्क रुख अपनाया। हालांकि उन्होंने बातचीत के प्रयास का समर्थन करते हुए कहा था कि यह अभी तय होना बाकी है कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर स्वीकार्य तथा सत्यापित समझौता कर पाएगा या नहीं, लेकिन मुझे बातचीत की कोशिश करने में कोई नुकसान नहीं दिखता।