
भाई दूज कब है, इसका मुहूर्त और उपाय जानिए
कब है भाई दूज
पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल द्वितीय तिथि की शुरुआत 14 नवंबर को सुबह 06.06 बजे हो रही है और इस तिथि का समापन बुधवार 15 नवंबर 2023 को शाम 5.17 बजे हो रही है। इसलिए उदयातिथि में भाई दूज यानी यम द्वितीया 15 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन दोपहर में भाई दूज की पूजा का महत्व तो आइये जानते हैं भाई दूज का शुभ मुहूर्त, शुभ योग और चंद्र दर्शन का समय..
भाई दूज का त्योहारः बुधवार 15 नवंबर 2023
भाई दूज अपराह्न पूजा समयः दोपहर 12:51 बजे से 02:55 बजे तक
सुकर्मा योगः 16 नवंबर दोपहर 1.30 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योगः सुबह 06:36 बजे से 06:54 बजे तक
अमृत सिद्धि योगः सुबह 06:36 बजे से 06:54 बजे तक
चंद्र दर्शन समयः शाम 05:00 बजे से 06:02 बजे तक
कैसे मनाते हैं भाई दूज और यम द्वितीया
कार्तिक शुक्ल द्वितीया यानी यम द्वितीया का त्योहार दिवाली के दूसरे दिन मनाया जाता है। रक्षाबंधन की तरह भाई बहनों के प्रेम का प्रतीक है। इसे भैय्या दूज, भाऊ बीज, भात्र द्वितीया और भतरु द्वितीया आदि नाम से जानी जाती है। इस तिथि पर मृत्यु के देवता यमराज की पूजा उनके अधीनस्थ चित्रगुप्त और यम-दूतों के साथ की जाती है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को टीका करके, उनकी लंबी आयु और खुशहाल जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं।
भाई दूज का महत्व
मान्यता है कि जो लोग यम द्वितीया के दिन बहनों को वस्त्र-दक्षिणा आदि से संतुष्ट करते हैं, उन्हें एक वर्ष तक कलह, अपकीर्ति और शत्रु-भय का सामना नहीं करना पड़ता। धन, यश, आयु, और बल की वृद्धि होती है। साथ ही भाई दूज के दिन बहन से तिलक कराने से लंबी आयु की प्राप्ति होती है।
इसके अलावा मान्यता है कि इस दिन जो बहनें अपने भाइयों को खाना खिलाती हैं, वह हमेशा सौभाग्यवती बनी रहती हैं। साथ ही बहनों के घर खाना खाने से भाइयों को लंबी उम्र मिलती है। इसलिए भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों के लिए शानदार खाना बनाती हैं और उन्हें अपने हाथों से खिलाती हैं।
कैसे करते हैं भाई दूज की पूजा
1. यम द्वितीया पूजा के लिए अपराह्न का सबसे उपयुक्त समय होता है। अपराह्न में यमराज की पूजा से पहले सुबह यमुना स्नान जरूर करना चाहिए। इसके बाद दोपहर में यमराज को अर्घ्य देना चाहिए।
2. इससे पहले कार्तिक शुक्ल द्वितीया को प्रातःकाल चंद्र दर्शन करें और इस दिन यमुना स्नान संभव नहीं है तो घर में तेल लगाकर स्नान करें।
3. स्नान के बाद मध्याह्न-काल में बहन के घर जाकर वस्त्र और द्रव्य आदि से बहन का सम्मान करना करें और भोजन करना चाहिए।
4. यदि अपनी बहन न हो तो अपने चाचा या मौसी की पुत्री या मित्र की बहन को अपनी बहन मानकर वस्त्र-दक्षिणा आदि से संतुष्ट करना चाहिए।
5. शाम को घर में दीपक (बिजली) जलाने से पहले घर के बाहर यमराज के लिए चार बत्तियों से युक्त दीपक जलाकर दीपदान करना चाहिए।
भाई दूज की कथा
प्राचीन कथा के अनुसार एक बार की बात है सूर्य पुत्री यमुना अपने लोक में उदास थीं, वह अपने भाई यमराज से भेंट करना चाहती थीं। लेकिन किसी कारणवश वो भाई से मुलाकात करने नहीं जा पा रहीं थीं, यह जानकारी सूर्य पुत्र को नारदजी से मिली। इस पर वे कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना से मिलने पहुंचे। भाई यमराज को अपने घर पाकर यमुना ने उनका तिलक किया और खूब आवभगत की, भोजन कराया। इससे यमराज बहुत प्रसन्न हुए और यमुना को वरदान दिया कि, इस दिन जिस व्यक्ति का तिलक उसकी बहन करेगी, उसके लंबी उम्र प्राप्त होगी। उसे सुख सौभाग्य भी मिलेगा। इसके अलावा इस दिन नारकीय जीवों को यातना से छुटकारा मिला और वे तृप्त हुए। वे पापमुक्त होकर सब बन्धनों से मुक्त हो गए। उन सबने मिलकर उस दिन एक महान उत्सव मनाया, जो यमलोक के राज्य को सुख पहुंचाने वाला था। इसलिए यह तिथि तीनों लोकों में यम-द्वितीया के नाम से विख्यात हुई।
Updated on:
14 Nov 2023 08:44 pm
Published on:
14 Nov 2023 08:43 pm
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