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आज के बाद से रातें होने लगेंगी छोटी, 21 मार्च को दिन और रात होंगे बराबर, जानें क्यों

Equinox on 21st March: आज दुनिया बड़ी खगोलीय घटना का गवाह बनने वाली है। इस दिन दिन रात बराबर होंगे और इसके बाद से रातें छोटी होने लगेंगी। आइये जानते हैं इसकी वजह क्या है।

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भारत

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Pravin Pandey

Mar 19, 2025

Equinox on 21 March importance

Equinox on 21 March importance

Equinox On 21 March Day And Night Equal: ज्योतिषी नीतिका शर्मा के अनुसार शुक्रवार 21 मार्च को दिन और रात बराबर होंगे। इस दिन 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की ही रात होगी। इसके बाद से रातें छोटी होने लगेंगी. आइये जानते हैं इसकी वजह क्या है।

ज्योतिषी नीतिका शर्मा के अनुसार 21 मार्च से सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर लंबवत होने लगेंगी। खगोलविद इस घटना को वसंत संपात कहते हैं। इसी दिन से ग्रीष्म ऋतु का प्रारंभ होना माना गया है।

नीतिका शर्मा ने बताया कि खगोलीय घटना के अनुसार 21 मार्च को सूर्य भूमध्य रेखा पर होने से दिन और रात बराबर रहेंगे। दिन 12 घंटे का तो रात भी 12 घंटे की रहेगी। इसके बाद 21 मार्च के बाद से ही दिन बड़े होने लगते है। वहीं रातें छोटी होने लगती है। यह परिवर्तन लगातार जारी रहेगा। इसे वसंत संपात भी कहा जाता है। वैसे तो साल में 365 दिन होते हैं और हर दिन 24 घंटे का होता है। लेकिन साल में चार दिन ऐसे होते हैं, जिनकी अलग ही खासियत है। इन चार दिनों में 21 मार्च, 21 जून, 23 सितंबर और 22 दिसंबर आते हैं।

ज्योतिषाचार्य शर्मा के अनुसार यूं तो सामान्य दिनों में दिन और रात 12-12 घंटे के होते है। लेकिन इसमें कुछ मिनट का अंतर होता है। लेकिन वर्ष में दो बार दिन और रात के बराबर होने की स्थिति बनती है। सूर्य के उत्तरायण के मध्य और सूर्य के दक्षिणायन के मध्य आने से दिन और रात 12-12 घंटे के होते हैं।

क्यों होते हैं दिन रात बराबर

ज्योतिषी शर्मा के अनुसार हमारी पृथ्वी साढ़े तेईस अंश झुकी हुई स्थिति में सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है। इससे कर्क रेखा, भूमध्य रेखा और मकर रेखा के बीच सूर्य की गति दृष्टि गोचर होती है। पृथ्वी अपने अक्ष पर झुके होने के साथ ही सूर्य का चक्कर एक अंडाकार मार्ग में लगाती है। जिससे दिन और रात की लम्बाई घटती बढ़ती रहती है। इसके प्रभाव से ही मौसम में गर्मी, सर्दी होती है।

इसी स्थिति में 21 मार्च और 23 सितंबर को सूर्य भूमध्य रेखा पर लंबवत रहता है। वहीं 23 सितंबर को सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में प्रवेश कर जाएगा। पृथ्वी अपने उत्तरायण पक्ष को 187 दिन में पूरा करती है। 21 मार्च से 23 सितंबर तक धीमी लेकिन 23 सितंबर से 21 मार्च तक गति तीव्र हो जाती है। इससे यह पक्ष 178 दिन में ही पूरा हो जाता है। पृथ्वी 3 जनवरी को सूर्य के सबसे ज्यादा समीप और 4 जुलाई को ज्यादा दूर होती है।

इधर, पूरे साल में दो बार ऐसा होता है, जब दिन और रात बराबर होते हैं। इसमें 20 -21 मार्च के अलावा 23 सितंबर को भी दिन रात बराबर होते हैं। इसी प्रकार 22 दिसंबर को सबसे छोटा दिन और 21 जून को बड़ा दिन होता है। सूर्य के उत्तरी गोलार्ध पर विषुवत रेखा पर होने के कारण ही 23 सितंबर को दिन और रात बराबर होते है।

इस घटना को इक्विनॉक्स कहते हैं। यह साल में दो बार होती है। इक्विनॉक्स के दौरान, सूर्य ठीक पूर्व में उगता है और ठीक पश्चिम में अस्त होता है, जिससे छाया अपेक्षाकृत कम बनती है। जैसे ही पृथ्वी की धुरी संतुलन के एक बिंदु पर पहुंचती है, जो उत्तरी गोलार्ध में वसंत और दक्षिणी गोलार्ध में शरद ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है।

साल में कब-कब होती है ऐसी खगोलीय घटना

20 अथवा 21 मार्च दिन रात बराबर

23 सितम्बर दिन रात बराबर

22 दिसंबर सबसे छोटा दिन

21 जून सबसे बड़ा दिन