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भाजपा में अलग-थलग पड़े बाहुबली रमाकांत, 2019 में खतरे में पड़ सकती है टिकट दावेदारी

लगातार बन रही पार्टी विरोधी  छवि से पार पाना बाहुबली रमाकंत के लिए बड़ी चुनौती  

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भाजपा नेता की बढ़ सकती है परेशानाी

रणविजय सिंह की रिपोर्ट

आजमगढ़. पिछले दिनों गृहमंत्रराजनाथ सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल चर्चा में आये भाजपा के बाहुबली नेता पूर्व सांसद रमाकांत यादव भाजपा में अलग थलग पड़ते दिख रहे है। माना जा रहा है कि भाजपा के जिला से लेकर राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व तक रमाकांत यादव की पार्टी विरोधी गतिविधियों से नाराज है। रमाकांत की एक और गलती उनपर भारी पड़ सकती है। सूत्रों की मानें तो रमाकांत खुद को नहीं बदले तो पार्टी उनका टिकट बदल देगी। अब इसमें सच्‍चाई कितनी है यह तो आने वाला समय बतायेगा लेकिन इसकी चर्चा जोरदार है। वैसे इस मुद्दे पर अभी न तो भाजपा के लोग खुद कुछ बोलने के लिए तैयार है और ना ही रमाकांत यादव।

बता दें कि वर्ष 2008 से बीजेपी में है। 2009 के लोकसभा चुनाव में वे भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गये थे। इसके पूर्व वे सपा और बसपा में रहे। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इन्‍हें मुलायम सिंह यादव के खिलाफ मैदान में उतारा था लेकिन रमाकांत यादव चुनाव हार गये थे।

केंद्र की सत्‍ता में बीजेपी के आने के बाद से ही रमाकांत की गतिविधियां बीजेपी के लोगों के गले नहीं उतर रही है। पिछले वर्ष मऊ में एक कार्यक्रम के बाद रमाकांत यादव ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और उन्‍हें पिछड़ा विरोधी बताते हुए जमकर हमला बोला था। उस समय बीजेपी ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान रमाकांत यादव ने पांच सीट पर दावेदारी की थी लेकिन भाजपा नेतृत्‍व ने उन्‍हें मात्र एक सीट दी और फूलपुर-पवई विधानसभा से रमाकांत के पुत्र अरूणकांत को मैदान में उतारा था। इसके बाद रमाकांत ने बाकायदा प्रेस कांफेंस कर उन सीटों पर निर्दल प्रत्‍याशी उतारने का दावा किया था कि जिनपर वे दावेदारी कर रहे थे। साथ ही रमाकांत ने यह भी कहा था कि यदि उनके प्रत्‍याशियों को बीजेपी के प्रत्याशियों से कम वोट मिला तो वे लोकसभा में टिकट नहीं मांगेगे और पार्टी वर्कर के रूप में काम करते रहेंगे। बाद में रमाकांत यादव सिर्फ एक ही सीट फूलपुर पर चुनाव लड़े।

वैसे रमाकांत यादव के बड़े भाई की बहू अर्चना यादव जो बीजेपी दीदारगंज से टिकट की दावेदारी कर रही थी भाजपा प्रत्‍याशी कृणमुरारी विश्‍वकर्मा के खिलाफ मैदान में उतरी। यह माना जा रहा था कि रमाकांत के सह पर ही वे मैदान में उतरी है। लेकिन अर्चना खुद की जमानत भी नहीं बचा पाई थी।

हाल में मार्टीनगंज में हुए ब्‍लाक प्रमुख उप चुनाव में रमाकांत यादव ने खुद को सपा का नेता बताने वाले ठाकुर मनोज सिंह का साथ दिया। इसे भी पार्टी विरोधी गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है। रमाकांत यादव का लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ जाना अब बीजेपी नेताओं को चुभने लगा है। ऐसी भी चर्चा है कि बीजेपी नेतृत्‍व ने रमाकांत यादव को सबक सिखाने का फैसला कर लिया है।

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