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आजमगढ़. खेल व खिलाड़ियों को बढ़वा देने के लिए सरकार विभिन्न मदां से धन दे रही है लेकिन शिक्षा विभाग के रहनुमा इस पर पानी फेर रहे हैं। इसकी वजह से प्रतिभाएं जहां निखर नहीं पा रही हैं वहीं स्वास्थ्य के प्रति भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जनपद में हर वर्ष क्रीड़ा शुल्क के रूप में लाखों रुपये कोष में जमा होता है और इसे खर्च भी नहीं किया जाता है। कुछ जनपद स्तरीय प्रतियोगिताएं कराकर इसका कोरम पूरा कर लिया जाता है। शेष बचे धन विभागीय लोगों की मिलीभगत से डकार लिया जाता है।
यही नहीं तमाम माध्यमिक विद्यालयों में खेल के मैदान ही नहीं है। वित्तविहीन विद्यालय के संचालक तो सारे धन हड़प लेते हैं और यह कोष में भी जमा नहीं करते हैं। इससे खेल की प्रतिभाएं प्रभावित हो रही हैं।
जिले में 96 माध्यमिक अनुदानित विद्यालय, 23 राजकीय विद्यालय एवं 500 से अधिक वित्तविहीन विद्यालय संचालित है। इसमें अधिकतर के पास खेल का मैदान ही नहीं है। खेल प्रतिभाओं को तरासने का काम स्कूल एवं कालेज से ही शुरू होता है लेकिन यहां पर खेल को जिम्मेदार लोगों ने हासिए पर डाल दिया है। माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9-12 तक छात्रों से 60 रुपये की दर से क्रीड़ा शुल्क वसूला जाता है। इसमें नियमतः दो माह का क्रीड़ा शुल्क जनपदीय क्रीड़ा कोष में जमा होता है। इससे जनपदीय, मंडलीय एवं प्रदेशीय प्रतियोगिताओं का आयोजन एवं प्रतिभाओं के आने-जाने का किराया तथा भोजन पर व्यय किया जाता है लेकिन कुछ विद्यालय तो एक भी पैसा इस कोष में जमा नहीं करते जबकि कुछ नाम मात्र की धनराशि जमा कर इतिश्री कर लेते हैं।
मजेदार बात है कि ऐसे विद्यालयों में खेल भी नहीं होता और सारा पैसा सत्रांत तक विद्यालय के जिम्मेदार डकार जाते हैं। खेलों के प्रति संवेदनहीनता और लूट से विद्यालयों में खेल प्रतिभाएं सिसक कर दम तोड़ रही हैं। विभाग को इसकी चिंता नहीं है और उच्चतरीय विभागीय अफसरों को भी इसकी परवाह नहीं है। यदि कोई शिकायत होती है तो उसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है।
जबकि केंद्र एवं राज्य सरकार जहां खेलेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया का नारा देकर 17 वर्ष से कम वर्ष के खिलाड़ियों को प्रोत्साहन करके पांच लाख प्रति वर्ष इस्टाइपेंड देने का काम कर रहीं है, वहीं उन्हीं के अफसर इस महत्वाकांक्षी योजना पर पानी फेर रहे हैं। क्रीड़ सचिव का कहना है कि विद्यालयों द्वारा बरती जा रही उदासीनता से न तो प्रतियोगिताएं ठीक से हो पाती है और नहीं खिलाड़ियों का कैंप लग पा रहा है। इसका एक मात्र कारण धनाभाव है। यदि विद्यालय सजग हो जाएं तो प्रतिभाएं निखरकर जनपद का नाम रोशन करेंगी।
Published on:
04 Nov 2018 02:01 pm

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