आजमगढ़. वर्ष 1999 का कारगिल युद्ध जिसमें देश की रक्षा के आन बान शान की रक्षा के लिए देश के सैकड़ों जवानों ने जान गंवा दी, लेकिन देश पर आंच नही आने दी। उन्हीं शहीद जवानों में एक आजमगढ़ के राम समुझ यादव भी है, जिन्होंने तेज बुखार के बीच न केवल 56/85 पहाड़ी पर चढ़ाई की बल्कि अपनी आठ सदस्यीय टीम के साथ चोटी पर पाक के 21 सैनिकों को मौत के घाट उतार चैकी पर कब्जा किया। इस लड़ाई में हिदुस्तान के आठ में से सात जवान शहीद हो गये। बस एक जवान एक जवान बचा उसने जब इस युद्ध् की कहानी बताई तो रोंगेटे खड़े हो गये। वैसे शहीद राम समुझ के परिवार को सरकार ने गैस एजेंसी दी और कुछ आर्थिक सहायता भी लेकिन उनके परिवार का शहीद पार्क बनवाने का सपना अभी अधूरा है। राम समुझ के भाई प्रमोद इस सपने को साकार करने में जुटे है। 30 अगस्त को उनकी याद में यहां एक मेले का आयोजन होगा, जिसमें राम समुझ की टुकड़ी के बचे एक मात्र सिपाही दुर्गा प्रसाद भाग लेंगे।