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प्राचार्य गौतम के खिलाफ केस दर्ज

-आदिवासी संगठनों ने रैली निकालकर दो घंटे घेरा थाना-आदिवासी शिक्षिका को प्रताडि़त करने का मामला-उत्कृष्ट प्राचार्य पद पर रहते किया था प्रताडि़त

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Editorial Khandwa

Jan 31, 2016


बड़वानी.
पिछले 10 दिन से चल रहे उत्कृष्ट प्राचार्य और शिक्षिका विवाद का रविवार को पटाक्षेप हो गया। आदिवासी संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से रैली निकालने और आजाक थाने के घेराव के बाद रविवार को आजाक पुलिस ने उत्कृष्ट प्राचार्य रहीं मनीषा गौतम के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 323 और एस्ट्रोसिटी एक्ट की धारा 3, 1, 10 के तहत प्रकरण दर्ज किया। आदिवासी संगठन कार्यकर्ताओं ने करीब दो घंटे तक थाने का घेराव कर रखा और पुलिस व प्रशासन को जमकर कोसा। साथ ही आदिवासी संगठन कार्यकर्ताओं ने मनीषा गौतम की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। एसडीओपी आजाक द्वारा जल्द ही कार्रवाई के आश्वासन के बाद शाम 5 बजे आदिवासी संगठनों ने घेराव खत्म किया।


20 जनवरी को उत्कृष्ट प्राचार्य मनीषा गौतम के खिलाफ शिक्षिका सेवंती डावर ने आजाक थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि प्राचार्य द्वारा उन्हें कमरे में बंद कर जबरन केश बुक और चेक बुक पर साइन करवाने के लिए प्रताडि़त किया गया और मारपीट कर जातिसूचक शब्दों से प्रताडि़त किया। इसके बाद से ही मामले ने तूल पकड़ लिया था। आदिवासी छात्र संघ शुरू से ही केस दर्ज करने की मांग कर रहा था। 10 दिन गुजर जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से आदिवासी संगठनों में आक्रोश पनपने लगा था। हाईप्रोफाइल मामला होने से पुलिस भी बार-बार जांच होने की बात कहकर टाल रही थी।


रैली के रूप में पहुंचे आजाक थाने

आदिवासी संगठनों ने पहले ही प्रशासन को चेतावनी दे दी थी कि रविवार तक केस दर्ज नहीं हुआ तो थाने का घेराव किया जाएगा। दोपहर 2 बजे इंद्रजीत छात्रावास से आदिवासी संगठनों ने संयुक्त रूप से रैली निकाली। रैली में आदिवासी संगठनों के करीब 200 से अधिक कार्यकर्ता शामिल हुए।रैली दोपहर 3 बजे आजाक थाने पहुंची जहां, संगठन कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर रोड पर ही बैठ गए। यहां आदिवासी संगठन के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर अपनी जमकर भड़ास निकाली। वहीं, मनीषा गौतम के कार्यकाल में बच्चों को प्रताडि़त करने के मामले भी सामने रखे।


सुबह ही कर लिया था केस दर्ज

मनीषा गौतम पर केस दर्ज करने को लेकर आदिवासी छात्र संघ द्वारा लगातार प्रदर्शन किया जा रहा था। आदिवासी संगठनों के बढ़ते दबाव के चलते पुलिस ने रविवार सुबह ही मनीषा गौतम के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था। पुलिस ने इसकी जानकारी आदिवासी संगठन पदाधिकारियों को भी दे दी थी। आदिवासी संगठनों द्वारा रैली और प्रदर्शन तय होने से सदस्य इकट्ठा हो गए थे। केस दर्ज होने के बाद आदिवासी संगठनों ने मनीषा गौतम की गिरफ्तारी को लेकर प्रदर्शन किया। आजाक एसडीओपी आरएस पाटीदार ने आश्वासन दिया कि जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।


भावुक हो गई पीडि़त शिक्षिका

प्रदर्शन के दौरान शिक्षिका सेवंती डावर ने अपनी आपबीती सुनाई। पीडि़त शिक्षिका ने कहा कि घटना वाले दिन मुझे प्राचार्य ने कमरे में बंद कर लिया था। इसके पूर्व भी कई बार वे उन्हें प्रताडि़त करती रही थीं। घटना वाले दिन किसी तरह से वे वहां से भागी और सीधे आत्महत्या करने नर्मदा पुल पहुंच गई थी। बाद में मेरे विवेक ने मुझे रोका और अपने बच्चों का ख्याल कर मैं वापस आ गई। घटना के बाद से बार-बार मुझे वो कमरे में बंद करने का नजारा आंखों के सामने दिख रहा है। जब थाने पर शिकायत करने आई तो पुलिस कहती है कि दो सामान्य वर्ग के गवाह लाओ। मैं जैसे तैसे अपनी जान बचाकर भागी थी, गवाह कहां से लाती। आदिवासी संगठनों की वजह से आज मुझे न्याय मिला है। अपनी आपबीती सुनाते समय शिक्षिका भावुक हो गई।


कई सालों से चर्चाओं में है गौतम

उत्कृष्ट विद्यालय प्राचार्य मनीषा गौतम अपने कार्यकाल के दौरान पिछले कई सालों से चर्चाओं में बनी हुई हैं। कई बार इन पर बच्चों को प्रताडि़त करने के आरोप भी लग चुके हैं। अभी कुछ महीनों से गौतम आए दिन चर्चाओं में बनी हुई हैं। पिछले दिनों सहायक आयुक्त के वायरल फोन टेप में भी गौतम मेडम का नाम आया था। उसके बाद पेपर लीक व छपाई के मामले में भी जांच चल रही है। अब ये मामला हो गया। इसमें मनीषा गौतम के खिलाफ आदिवासी लामंबद हुए और अंत में उन पर एफआईआर दर्ज हुई।


ये संगठन हुए शामिल

रैली और धरना प्रदर्शन में आरक्षण बचाओ, संविधान बचाओ समिति, अनुसूचित जाति जनजाति, कर्मचारी संघ, दलित आदिवासी जागृत संगठन, आदिवासी युवा संगठन पाटी, आदिवासी मुक्ति संगठन, आदिवासी एकता परिषद, जादिवासी छात्र संगठन, नेशनल एससी/एसटी/ओबीसी, स्टूडेंट यूथ फ्रंट, जय आदिवासी युवा संगठन, मप्र आदिवासी अधिकारी कर्मचारी संघ, भील समाज सुधारक समिति, दलित साहित्य एकादमी, आदिवासी विकास परिषद के साथ ही आजाद अध्यापक संघ के कार्यकर्ता भी शामिल थे।