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Flood Risk-नदियों के किनारे बसे 135 गांवों में रहता है बाढ़ का खतरा

जिले में नदियों के किनारे बसे 135 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, वर्षा ऋतु प्रारंभ हो गई है। नदी-नालों का जल स्तर बढऩे लगा है। ऐसे में तेज बारिश होती है तो नदी के मुहाने बसे गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगेगा। बालाघाट. जिले में नदियों के किनारे बसे 135 […]

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बाढ़ का खतरा

वैनगंगा नदी के छोटे पुल में नजर आता जल स्तर।

जिले में नदियों के किनारे बसे 135 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, वर्षा ऋतु प्रारंभ हो गई है। नदी-नालों का जल स्तर बढऩे लगा है। ऐसे में तेज बारिश होती है तो नदी के मुहाने बसे गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगेगा।

बालाघाट. जिले में नदियों के किनारे बसे 135 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, वर्षा ऋतु प्रारंभ हो गई है। नदी-नालों का जल स्तर बढऩे लगा है। ऐसे में तेज बारिश होती है तो नदी के मुहाने बसे गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगेगा। जिले में बहने वाली वैनगंगा, बावनथड़ी, चंदन, बाघ, महकारी, मानकुंवर, घिसर्री, सोन, बड़ी बाघ, छोटी बाघ, देव व बंजर नदी में बाढ़ आने के कारण जिले के 135 गांवों की आबादी प्रभावित होती है। यह समस्या प्रतिवर्ष की बनी हुई है। इधर, प्रशासन बाढ़ से निपटने के लिए सभी प्रशासनिक इंतजाम किए हुए है।
वैनगंगा, बाघ, सोन, चंदन, बावनथड़ी नदी के मुहाने बसे हुए हैं 135 गांव

जानकारी के अनुसार इस वर्ष मौसम विभाग ने जिले में तेज बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में नदी के मुहाने बसे हुए ग्रामों में बाढ़ की संभावना भी अधिक हो जाती है। हालांकि, अभी बारिश उतनी नहीं हुई है। लेकिन इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जिले में अभी तक 8 इंच ही औसत बारिश हो पाई है। जिसमें सबसे अधिक बैहर तहसील और सबसे कम किरनापुर तहसील में बारिश रिकार्ड की गई है। आगामी समय में भारी बारिश होने की पूरी संभावना बनी हुई है। इधर, बाढ़ की वजह से ग्रामीणों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
बाढ़ त्रासदी का झेल चुके हैं दंश
जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम पंचायत कुम्हारी, रजेगांव, किरनापुर क्षेत्र के नीलागोंदी, पुलपुट्टा, लांजी क्षेत्र के उमरी, शंकरटोला, खैरलांजी क्षेत्र के घोटी सहित ऐसे अनेक ग्राम हैं, जो बाढ़ त्रासदी का दंश झेल चुके हैं। दरअसल, ये ग्राम नदी के मुहाने पर बसे हुए हंै। इन गांवों में सबसे पहले बाढ़ का पानी पहुंचता है।
जिले में बाढ़ की एक वजह ये भी
जिले में यदि मूसलाधार बारिश नहीं होती है तो भी नदियों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। दरअसल, महाराष्ट्र राज्य के गोंदिया जिले के सिरपुर, कालीसरार, पुजारीटोला डेम से पानी छोडऩे से लांजी-किरनापुर क्षेत्र में बाघ, सोन नदी उफान पर होती है। जिसके कारण बाढ़ के हालात उत्पन्न हो जाते हैं। इसी तरह सिवनी जिले से भीमगढ़ बांध, बालाघाट जिले से राजीव सागर बांध परियोजना से वैनगंगा नदी में पानी छोड़ा जाता है। जिसकी वजह से भी वैनगंगा नदी में बाढ़ आती है।
इन तहसीलों में प्रभावित होते हैं गांव
जिले में बहने वाली नदियों किनारे करीब 135 गांव है। जहां की आबादी अधिक बारिश से प्रभावित होती है। खैरलांजी तहसील के 26 ग्राम चंदन नदी, बावनथड़ी व वैनगंगा नदी की बाढ़ से प्रभावित होते हैं। वारासिवनी तहसील के 3 ग्राम, बालाघाट तहसील के 25 ग्राम, किरनापुर तहसील के 31 ग्राम, लांजी तहसील के 48 ग्राम और बैहर तहसील के 2 ग्राम बाढ़ की जद में आते हैं। इस प्रकार जिले में बहने वाली वैनगंगा, बावनथड़ी, चंदन, बाघ, महकारी, मानकुंवर, घिसर्री, सोन, बड़ी बाघ, छोटी बाघ, देव, बंजर नदी में बाढ़ आने के कारण जिले के 135 गांवों की आबादी प्रभावित होती है।
प्रशासन भी है तैयार
बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने भी पूरी तैयारी कर ली है। एसडीइआरएफ, गोताखोरों को पहले से ही सतर्क कर दिया गया है। वहीं बचाव दल के लिए जरुरी आवश्यक सामग्रियों को भी तैयार कर लिया गया है। ताकि आवश्यकता पडऩे पर तत्काल मदद के लिए संबंधित स्थान में पहुंच सकें। वहीं बाढ़ की सूचना देने के लिए कंट्रोल रुम भी बनाया गया है। जिसमें सूचना मिलते ही राहत दल मौके पर पहुंच जाता है।
तहसीलवार बारिश की स्थिति
तहसील बारिश
बैहर 302 मिमी
परसवाड़ा 279 मिमी
बिरसा 266.3 मिमी
तिरोड़ी 253.9 मिमी
लालबर्रा 246 मिमी
बालाघाट 242.4 मिमी
वारासिवनी 215.5 मिमी
कटंगी 150.7 मिमी
खैरलांजी 94.4 मिमी
लांजी 84 मिमी
किरनापुर 80.2 मिमी