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1 माह से गांव में कैद खैरलांजी के वांशिदें

बारिश के बाद मुख्य सड़क मार्ग पर पुल डुबने से बने हालात

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1 माह से गांव में कैद खैरलांजी के वांशिदें

1 माह से गांव में कैद खैरलांजी के वांशिदें

तिरोड़ी/महकेपार। तिरोड़ी तहसील के पठार अंचल अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत अंबेझरी का वनाचंल गांव खैरलांजी करीब 1 माह से गांव के भीतर ही कैद हो गया है। दरअसल, राजीव सागर बांध के किनारे बसे इस गांव को जोडऩे वाले मुख्य सड़क मार्ग पर बनी 300 मीटर लंबी पुलिया पर बारिश के बाद कई फीट उपर तक पानी बह रहा है। इस कारण ग्रामीण इस मार्ग से कहीं भी आना-जाना नहीं कर पा रहे हैं। जिन ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए ग्राम पंचायत अंबेझरी या अन्य गांव सहित तहसील आना-जाना होता है, वह जंगल के बीच कच्ची सड़क से आवागमन कर रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण तहसील मुख्यालय तिरोड़़ी से सीधे जुडऩे के लिए पीपरवानी के रास्ते से सफर करने को मजबुर है। ग्रामीणों की माने तो अगर काम के सिलसिले में गांव के बाहर तो शाम के बाद जंगल के रास्ते से जाने की बजाए अंबेझरी में परिचित के किसी भी व्यक्ति के यहां शरण लेनी पड़ती है।
गौरतलब हो कि आजादी के 7 दशक बाद तक मुख्यधारा से पिछड़े खैरलांजी गांव के ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोडऩे के लिए साल 2016-17 में अंबेझरी से खैरलांजी तक पक्की सड़क का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही गांव के नजदीक एक पुल भी बनाया गया। लेकिन इस पुलिया की ऊंचाई काफी कम रखी गई। इस कारण अब हर साल बारिश के मौसम में बांध का जलस्तर बढ़ते ही इस पुलिया से कई फीट पानी बहने लगता है और आवागमन बंद हो जाता है। बताया जाता है कि कई बार ग्रामीण नौका चलाकर रास्ता पार करते हैं।
ग्रामीणों की माने तो इस पुल निर्माण के वक्त पुल की ऊंचाई अधिक रखने की मांग की थी। लेकिन उस वक्त किसी ने इन ग्रामीणों की बात नहीं सुनी थी। जिसका खामियाजा आज गांव की जनता भुगत रही है। बहरहाल, बीते 2 साल से ग्रामीण लगातार शासन-प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराते हुए नये एवं ऊंचे पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं। मगर, अब तक ग्रामीणों की मांग को तव्वजों नहीं मिली है। सरपंच सुखदेव सलामे, कन्हैया मर्सकोले, मनीराम दशमेर, दशराज मर्सकोले, दिनेश मुर्खे, गणपत मर्सकोले, धामसिंग कोकोड़े, राजकुमार बाघमारे, विश्वेश्वर श्रीवारे, भाऊदास मर्सकोले, मनीराम मर्सकोले, कमल कोकोडे, नरेन्द्र कुम्भरे, विजय उईके, देजराज उईके, उपसरपंच-इंद्राबाई कुम्भरे, रायवंतीबाई मर्सकोले, विमलाबाई कोकोडे, मनीराम कोकोडे, ज्ञानीराम मुर्खे, मयतलाल उईके, झनकलाल उईके, सुरेंद्र कोकोडे, बिरसुला बाई उइके, इंद्रलाल वरकड़े ने अपनी समस्या पर ध्यानाकर्षण कराते हुए शासन-प्रशासन से शीघ्र ही ऊंचा पुलिया निर्माण कराने की मांग की है।