
बावनथड़ी नदी से बंद किया जाए रेत घाट
बालाघाट. तिरोड़ी तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कोड़बी में ग्राम पंचायत को दो राज्यों की जीवनदायिनी बावनथड़़ी नदी पर स्वीकृत रेत घाट को बंद कराने और बावनथड़ी बचाओ अभियान को लेकर ग्रामीण 13 दिसम्बर से अनवरत धरना प्रदर्शन व आंदोलन कर रहे है। ग्रामीण धरना प्रदर्शन और आंदोलन कर प्रशासन से पंचायत को स्वीकृत रेतघाट को बंद कराने व बावनथड़ी नदी में किसी भी तरह का रेतघाट स्वीकृत ना कराने की मांग कर रहे है। ग्रामीण रेतघाट को बंद कराने के पीछे कुछ बुनियादी तर्क दे रहे है। मगर, शासन-प्रशासन ग्रामीणों के उन तर्कों पर ध्यान देने की बजाए धरना प्रदर्शन को किसी भी तरह से टालने की कोशिश कर रहा है। मंगलवार को कलेक्टर के निर्देशन पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के नेतृत्व में आरआई व पटवारियों के एक दल ने कोड़बी रेतघाट का सीमाकंन किया। इस दल ने सीमाकंन के दौरान पाया कि कोड़बी में पहन 7 के खसरा नंबर 250 रकबा 4.960 हेक्टेयर में ही खनन किया जा रहा है। गौरतलब हो कि प्रशासन की यह जांच ग्रामीणों को भम्रित करने वाली है। चूंकि ग्रामीणों ने अवैध रेत खनन से जुड़ी शिकायत नहीं बल्कि गांव के शमशाम घाट व चारागाह की भूमि खसरा क्रमांक 84 व 85 में रेत का भंडारण किए जाने, बावनथड़ी नदी में लगातार होने वाले खनन से नदी के किनारे के गांवों को जलस्तर कमजोर होने, नदी में चल रहे रेत खनन से नदी के किनारे पंप लगाकर करीब 15 सौ एकड़ के खेतों में फसलों की सिंचाई करने वाले किसानों की खेती भविष्य में प्रभावित होने का अनुमान लगाते हुए बावनथड़ी नदी पर रेत खनन पर रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन प्रशासन ग्रामीणों की उक्त समस्याओं को समझने की बजाए नदी में रेतघाट का सीमांकन कर ग्रामीणों को गुमराह कर रहा है।
कोड़बी का रेतघाट भले ही कागजी तौर पर ग्राम पंचायत को स्वीकृत है। इस बात से बिलकुल भी इंकार नहीं किया जा सकता लेकिन जो ग्रामीण अपने कामकाज छोड़कर 4 दिनों से धरना दे रहे है, उन ग्रामीणों की भी अनदेखी नहीं की जा सकती। जनचर्चा पर गौर करें तो जिले के सफेदपोश नेता और समाजसेवी ने अपनी काली कमाई के लिए प्रशासन पर दबाव डालकर ग्राम पंचायत को रेतघाट स्वीकृत कर कमाई का जरिया बना लिया है। यह सबकुछ सोची समझी रणनीति के तहत किया गया। जैसा कि जगजाहिर है बावनथड़़ी नदी से निकलने वाली रेत डंपरों के माध्यम से महाराष्ट्र से लेकर राज्य के कई बड़े महानगरों तक पहुंचाई जाती है। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन 100 से 150 डंपर रेत निकालकर बेची जा रही है। किन्तु दस्तावेजों में केवल चंद डंपर ही दर्ज किए जा रहे है। इस बात की पुख्ता जानकारी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को भी है। लेकिन वरिष्ट अधिकारियों, नेता के दबाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। मंगलवार को अनुविभागीय अधिकारी प्रमोद सेनगुप्ता, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस सुमित केरकेट्टा, तहसीलदार शोभना ठाकुर ने धरने पर बैठे ग्रामीणों को निर्धारित स्थल पर ही खनन की जानकारी देते हुए धरना बंद करने की अपील की लेकिन ग्रामीण रेतघाट बंद कराने की मांग पर ही अड़े रहे।
विदित हो कि भाजपा के शासनकाल में कांग्रेस नेता रेत खनन को लेकर अक्सर भाजपा को कोसते रहते थे। लेकिन अब जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है तथा वारासिवनी विधायक प्रदीप जायसवाल राज्य के खनिज मंत्री है। कटंगी से कांग्रेस पार्टी के विधायक टामलाल सहारे है फिर भी कांग्रेस के एक युवा नेता नीरज हीरावत को ग्रामीणों के साथ रेतघाट बंद कराने के लिए धरना प्रदर्शन करना पड़़ रहा है। ग्रामीणों ने खनिज मंत्री, विधायक तथा कलेक्टर का ध्यानाकर्षण कराते हुए बावनथड़ी के अस्तित्व को बचाने के लिए तत्काल रेतघाट बंद कराने तथा भविष्य में रेतघाट स्वीकृत ना कराने की मांग की है।
Published on:
18 Dec 2019 01:36 pm
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