
कटंगी परिक्षेत्र के आंजनबिहरी में 11 दिसंबर को मिला था शव, पोस्टमार्टम से हुई थी शिकार की पुष्टि
बालाघाट. दक्षिण वनमंडल, कटंगी परिक्षेत्र के आंजनबिहरी के जंगल में करंट लगाकार बाघ का शिकार करने वाले आरोपियों को वन विभाग की टीम नहीं पकड़ पाई है। 11 दिसंबर को आंजनबिहरी जंगल के कक्ष क्रमांक-562 स्थिरत घोड़देव बाबा मंदिर के समीप बाघ का शव मिला था।
पोस्टमार्टम के बाद करंट लगाकर शिकार किए जाने का खुलासा हुआ। इसकी जानकारी होते ही महकमे में खलबली मच गई। डीएफओ से लगायत रेंजर तक ने भाग-दौड़ शुरू की। लेकिन एक माह पार होने के बाद भी आरोपियों के गिरेबान तक उनके हाथ नहीं पहुंच पाए हैं।
गौरतलब है कि 11 दिसंबर की शाम को बाघ का शव मिला। वन अमले ने शव को तीन दिन पुराना बताया। 12 दिसंबर को पशु चिकित्साधिकारियों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। करंट लगाकर बाघ का शिकार किए जाने की पुष्टि हुई। उस समय वन विभाग की टीम ने दावा किया था कि बाघ के शरीर के सारे अंग सुरक्षित थे।
प्रोटोकाल का पालन करते हुए बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। इसके पूर्व मौके पर बुलाए गए डाग स्क्वॉड टीम ने पांच से सात किमी दूर तक सर्चिंग की थी। वन विभाग ने इस मामले में अज्ञात के खिलाफ संबंधित धाराओ में प्रकरण दर्ज किया है।
अब देखना यह है कि सागौन सहित अन्य लकडिय़ों के के साथ तस्करों को पकडऩे वाली टीम अधिकांश मामलों में यह पता नहीं लगा पाती कि उक्त पेड़ों की कटाई किस जंगल से और कब हुई थी।
पांच माह पूर्व दक्षिण वनमंडल, लालबर्रा परिक्षेत्र के सोनेवानी में जिम्मेदारों ने बाघिन के शव को जलाकर साक्ष्य नष्ट कर दिए। बाघिन की मौत कहां और कैसे हुई? यह दक्षिण वनमंडल का भारी भरकम अमला सहित एसटीएसएफ की टीम पांच माह बाद भी पता नहीं लगा पाई है। ऐसे में अब देखना यह है कि वन व वन्यप्राणियों के रखवाले करंट लगाकर बाघ का शिकार करने वाले आरोपियों को कब तक गिरफ्तार कर पाते हैं।
खास है कि उस समय एसडीओ कटंगी ने कहा था कि शिकारियों को पकडऩे के लिए अलग से टीम गठित की गई है। लेकिन उक्त टीम ने अब तक क्या-क्या कार्रवाई की है? यह मालूम नहीं चल पाया है। इस संबंध में डीएफओ निथ्यानंतम एल ने बताया कि अभी तक बाघ का शिकार करने वालों का पता नहीं चला है।
Published on:
13 Jan 2026 08:14 pm
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