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राज्य स्तरीय महिला कबड्डी प्रतियोगिता की चैम्पियन बनी रीवा

महाविद्यालयीन राज्य स्तरीय महिला कबड्डी प्रतियोगिता में रीवा संभाग ने इंदौर को हराकर विजेता बनी। प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनी रीवा की श्रद्

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बालाघाट. महाविद्यालयीन राज्य स्तरीय महिला कबड्डी प्रतियोगिता में रीवा संभाग ने इंदौर को हराकर विजेता बनी। टूर्नामेंट का फाइनल मैच गुरूवार को दोपहर १.३० बजे रीवा व इंदौर के बीच खेला गया। जिसमें रीवा ने इंदौर को ३७-२८ अंक से पराजित किया। रीवा की ओर से श्रद्धा द्विवेदी जो जुनियर इण्डिया टीम में खेल चुकी है सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी होने का गौरव प्राप्त किया। टूर्नामेंट के समापन अवसर पर केबिनेट मंत्री गौरीशंकर बिसेन, भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश रंगलानी, डॉ. बीएम शरणागत, ऋषभदास वैद्य, पुलिस अधीक्षक अमित सांघी बतौर अतिथि उपस्थित रहे।
गौरतलब हो कि गुरूवार को पहले दूसरा सेमीफाइनल मैच रीवा व सागर के बीच खेला गया। जिसमें रीवा ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए एकतरफा सागर को ६९-१२ अंक से पराजित किया। मैच में निर्णायक के रूप में कबड्डी नेशनल खिलाड़ी संगीतासिंह, अब्दुल हक रहे। विजेता खिलाडिय़ों को अतिथियों के हाथों ट्राफी व प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
खेल को बढ़ावा दे रही सरकार
इस दौरान केबिनेट मंत्री बिसेन ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा खेल में महिलाएं आगे बढ़े इसका पूरा प्रयास कर रही है। खेल को बढ़ावा देने शासन द्वारा खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से खेलों का आयोजन व खिलाडिय़ों को सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा महाविद्यालयीन महिला कबड्डी टूर्नामेंट के लिए बालाघाट पीजी कॉलेज का चयन किया जो जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि जिले में समय समय पर सभी खेलों का आयोजन किया जाता है। जिससे खिलाडिय़ों को खेलने का अवसर मिलता है।
खेल से शरीर स्वस्थ
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक सांघी ने कहा कि पढ़ाई के साथ खेलकूद भी जरूरी है। खेल खेलने से शरीर स्वस्थ व फुर्तीला रहता है। कबड्डी काफी प्राचीन खेल है जिसके प्रति लोगों में रूचि कम होते जा रही है। इस तरह के आयोजन से खिलाडिय़ों में उत्साह बढ़ता है।
इनका रहा सहयोग
खेल के सफल संचालन में पीजी कॉलेज प्राचार्य डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, क्रीडा अधिकारी जेएस सौंधी, खेल शिक्षक विनोद ठाकुर, मनीष शिवहरे, आशीष चर्तुवेदी, ललीत कामड़े, अर्चना पाठक, संजय मर्सकोले, विवेक खरगाल, लीलाधर चचाने, सुरेश चौधरी, कविता क्षीरसागर, अरविंद डेहरिया सहित अन्य का सराहनीय सहयोग रहा।