
बालाघाट । Balaghat
देश व प्रदेश में जहां लगभग सभी नदियां अवैध रेत खनन सहित अनेक कारणों के चलते इन दिनों अपने अस्तित्व के लिए लड़ती दिख रही हैं। वहीं इस मामले में न तो प्रदेश का सबसे अधिक हरियाली वाला जिला बालाघाट भी अछुता रहा है और न ही वहां बहने वाली वैनगंगा नदी।
ऐसे में जहां इस वर्ष अप्रैल-मई 2022 से ही तालाब व नदियों का जल स्तर तेजी से कम हो रहा है। वहीं जिले की जीवनदायिनी वैनगंगा नदी के गिरते जलस्तर से लोगों को पानी को लेकर चिंता सताने लगी है।
तालाबों व कुएं का जलस्तर भी काफी कम हो गया है। इसी तरह स्थिति बनी रही तो जून माह में पानी की समस्या बढ़ जाएगी। जंगलों में बने गड्ढों व नालों में भी पानी सूखने से वन्यजीवों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। गौरतलब हो कि नदियों में धड़ल्ले से हो रहे अवैध रेत खनन के चलते भी नदी हर वर्ष गहरी हो रही है।
जिससे जलस्तर नीचे जाते जा रहा है। नदियों का पानी भी रेत नहीं होने से अंदर की मिट्टी बाहर आनेे से दूषित हो रहा है। लेकिन आरोप है कि इस ओर अब तक शासन-प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
बांध से पानी छोड़े जाने की मांग
नदियों में पानी कम होने से तैराकों व नदी तट किनारे रहने वालों ने बांध से पानी छोड़े जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बांध से पानी छोड़ा जाए जिससे नहाने लायक पानी हो सके और मवेशियों व वन्यजीवों को भी नदियों में नहाने व पीने के लिए पानी मिल सकें।
वैनगंगा के नहाने व तैराकी वाले घाटों में भी पानी नहीं होने से तैराक परेशान है। नदी के घाटों में पानी कम होने से पानी दूषित हो गया है। जिससे नहाने वालों की संख्या दिनों दिन कम होते जा रही है। नगर के प्रमुख घाट बजरंग घाट, आमाघाट, जागपुर घाट सहित अन्य घाटों में पानी नहाने लायक नहीं रहा है।
बाड़ी लगाने से भी कम हुई धार
वैनगंगा नदी में सुबह सैर व जोगिंग करने आने वाले गणमान्य उपाध्याय, एस बिसेन, हितेन चौहान, रोमेश सोनवाने व अन्य ने बताया कि वर्तमान में वैसे ही वैनगंगा नदी से का जल स्तर कम हो गया है। उस पर नदी किनारे करीब आठ से दस लोगों द्वारा ककड़ी, ढिंगरा, खीरा इत्यादि की खेती के लिए बाड़ी लगाई जा रही है। जिनके द्वारा नदी के पानी से बिलकुल सटकर बाड़ी लगाई जा रही है।
इस कारण नदी में बहने वाली धार भी बहुत कम हो गई है और पानी बहुत थम सा गया है। इस वर्ष बाड़ी क पूरी तैयारियां होने लगी है। इन्होंने बताया कि बाड़ी लगाने वालों द्वारा बिना किसी अनुमति के यहां नदी के हिस्से के बड़े को प्रभावित किया जा रहा है। जिस पर शीघ्र ही रोक नहीं लगाई गई तो पानी धार पूरी तरह से बंद हो जाएगी। जिससे नदी के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा।
Published on:
24 May 2022 04:13 pm
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