17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन बेअसर, शहर में पॉलीथिन का ढेर कई जगहों पर

डेढ़ साल पहले ही शासन ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद सिंगल यूज प्लास्टिक व पॉलीथिन पर रोक के बावजूद जिला मुख्यालय में पॉलीथिन का उपयोग जमकर हो रहा है।

2 min read
Google source verification
कुंदरूपारा में भूमिभरण योजना के तहत गड्ढों को भर रहे, इनमें बहुतायत में प्लास्टिक ,कुंदरूपारा में भूमिभरण योजना के तहत गड्ढों को भर रहे, इनमें बहुतायत में प्लास्टिक

सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन बेअसर, शहर में पॉलीथिन का ढेर कई जगहों पर

बालोद. डेढ़ साल पहले ही शासन ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद सिंगल यूज प्लास्टिक व पॉलीथिन पर रोक के बावजूद जिला मुख्यालय में पॉलीथिन का उपयोग जमकर हो रहा है। नगर पालिका मामले में कार्रवाई को लेकर सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। वहीं जगह-जगह पॉलीथिन का ढेर शहर में आसानी से देखा जा सकता है। मवेशी भी इसे खाकर बीमार पड़ रहे हैं और कई मवेशियों की मौत भी हो रही है। नगर के कुंदरूपारा की ओर नगर पालिका भूमिभरण योजना के तहत गड्ढों में कचरा डालकर समतल कर रही है। गंभीर बात यह है कि यहां कचरों के साथ बड़ी मात्रा में पॉलीथिन भी फेंक रहे हैं। नगर प्रशासन को सख्ती बरतने की जरूरत है।

मवेशियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़
गौरक्षा अभियान सेवा दल के अजय यादव, नरेंद्र जोशी, शुभम ने कहा कि मवेशियों की सेहत के प्रति किसी का ध्यान नहीं है। नगर पालिका से मांग की है कि शहर में पॉलीथिन पर रोक लगाई जाए। इससे होने वाले नुकसान के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने इस पर बैन लगाया, पर यह बेअसर दिखने लगा है। पॉलीथिन का इंसान और पर्यावरण पर बुरा असर हो रहा है। बावजूद जिला और निगम प्रशासन के अधिकारी कार्रवाई को लेकर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

शहर में निकलने वाले कचरे पर एक नजर
शहर में कुल वार्ड -20
प्रतिदिन निकलने वाला कचरा -7 टन
सबसे ज्यादा कचरा- बुधवारी बाजार, बस स्टैंड, सदर मार्ग
कचरों में सबसे ज्यादा - झिल्ली, ठोस पॉलीथिन

नगर प्रशासन व पशु चिकित्सा विभाग भी मौन
पॉलीथिन तरह-तरह के होते हैं, लेकिन नष्ट नहीं होने वाली पन्नी में विषैले पदार्थ होते हैं, जो गाय और दूसरे जानवरों के लिए घातक हैं। पॉलीथिन खाने से मवेशियों की तड़प-तड़प कर मौत हो जाती है। जिला मुख्यालय में अभी तक नगर प्रशासन व पशु चिकित्सा विभाग ने इसे रोकने कोई पहल नहीं की है। अभी तक दोनों विभागों ने जागरुकता अभियान भी नहीं चलाया है।

पॉलीथिन को नहीं पचा पा रहे मवेशी
लोग घरों का कचरा कैरीबैग में लाते हैं और फेंक देते हैं। नगर पालिका की सफाई टीम भी कचरा खुली जगह में फेंक देती है। लोग इनके अंदर रखी सब्जियों के खराब अंश कतरन, अनाज व फलों के छिल्के पॉलीथिन समेत गाय और अन्य जानवर खा लेते हैं। इनके पेट में जाकर फंस जाती है। वेटनरी विभाग में इसके चार से पांच मामले आते हैं, जिनका एकमात्र इलाज ऑपरेशन होता है। इससे गाय बच गई तो यह किस्मत की बात होती है।

पॉलीथिन का मवेशियों पर गंभीर असर
पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक टीडी सिहारे ने कहा कि पॉलीथिन का सेवन मवेशी कर रहे हैं तो इसका असर गंभीर रूप से पड़ेगा। मवेशियों की मौत भी हो सकती हैं। विभाग समय-समय पर पशुपालकों को जागरूक करता है कि मवेशियों के सामने पॉलीथिन न फेंके और न ही इसका उपयोग करें, लेकिन लोगों में जागरुकता नहीं आई है।

लोगों में जागरुकता नहीं आई
नगर पालिका बालोद के सफाई निरीक्षक पूर्णानंद आर्य ने कहा कि नगर पालिका की टीम लगातार सिंगल यूज पॉलीथिन बेचने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। नगर में कुछ लोगों पर कार्रवाई भी की गई हैं। लोगों से अपील भी करते हैं कि पॉलीथिन न फेंके। लोगों में जागरुकता नहीं आई है।