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आज व्रती महिलाएं तालाब में कमर तक डूबकर सूरज को देंगी अर्घ्य

locationबालोदPublished: Nov 18, 2023 11:46:33 pm

लोक आस्था का महापर्व छठ शुरू हो गया है। शुक्रवार नहाय खाय के साथ को छठी मैया का व्रत रखने वाली महिलाओं ने खरना किया। रविवार को बूढा तालाब पहुंचकर छठी मैया की पूजाकर तालाब में कमर भर पानी में डूबकर डूबते सूरज को अर्घ्य देंगी।

साफ-सफाई के अभाव में बूढ़ा तालाब में जाकर महिलाएं करेंगी पूजा
बुढ़ा तालाब के घाट की सफाई कराई गई

बालोद. लोक आस्था का महापर्व छठ शुरू हो गया है। शुक्रवार नहाय खाय के साथ को छठी मैया का व्रत रखने वाली महिलाओं ने खरना किया। रविवार को बूढा तालाब पहुंचकर छठी मैया की पूजाकर तालाब में कमर भर पानी में डूबकर डूबते सूरज को अर्घ्य देंगी। अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए 36 घंटे का कठिन व्रत रखकर सोमवार को उगते सूरज को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ेंगी। यूपी-बिहार छठ पूजन समिति ने भी छठ पूजा की तैयारी पूर्ण कर ली है।

गंगा सागर तालाब गंदा इसलिए बूढ़ातालाब में होगा छठ पूजा का आयोजन
शहर का ऐतिहासिक गंगा सागर तालाब इन दिनों उपेक्षा का शिकार होने से गंदा हो गया है। वहीं साफ सफाई भी नहीं होने के कारण अब पहली बार बूढ़ातालाब के नए घाट पर छठ पूजा होगी।

यह है छठ पूजा का प्रसाद
ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पूड़ी, खजूर, सूजी का हलवा, चावल का बना लडू। सूर्य को अघ्र्य देते समय यह प्रसाद सूप में रखते हैं। बांस की दो-तीन डलिया, सूप, लोटा, थाली, दूध, जल, नए वस्त्र, बड़ा दीपक, पानी वाला नारियल, गन्ना, शकरकंद हल्दी, अदरक, नाशपाति नींबू, शहद, पान, साबूत सुपारी, कपूर आदि सामग्री रखते हैं।

नगर पालिका ने कराई घाट की सफाई
नगर पालिका के सफाई निरीक्षक पूर्णानंद आर्य ने सफाई टीम के साथ छठ पर्व के आयोजन स्थल बुढ़ा तालाब के घाट की सफाई कराई। यह पहली बार है जब बूढ़ातालाब में छठ पूजा का आयोजन होगा।

36 घंटे के लिए निर्जला उपवास रहेंगी
व्रतधारी महिलाएं नहाकर नए वस्त्र पहनकर भोजन किया। इसके बाद अगले 36 घंटे के लिए निर्जला उपवास रहेंगी। छठ पर्व की शुरुआत नहाय खाय से होती है। इसके बाद खरना होता है। खरना के बाद अगले दिन व्रत रहने के बाद डूबते सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है।

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