बालोद

कपिलेश्वर शिव मंदिर समूह में सिर्फ महाशिवरात्रि के दिन होती है विशेष पूजा

शनिवार को भक्ति भाव के साथ भक्त महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा करेंगे, लेकिन जिले में कई ऐसे प्राचीन शिव मंदिर हैं, जो अपनी विशेषता के लिए जाने जाते हैं। उसी में से एक जिला मुख्यालय के नयापारा में स्थित 11वीं शताब्दी का शिवलिंग, भगवान गणेश की मूर्तियां आज भी शोभायमान है।

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कपिलेश्वर शिव मंदिर समूह में सिर्फ महाशिवरात्रि के दिन होती है विशेष पूजा

बालोद. शनिवार को भक्ति भाव के साथ भक्त महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा करेंगे, लेकिन जिले में कई ऐसे प्राचीन शिव मंदिर हैं, जो अपनी विशेषता के लिए जाने जाते हैं। उसी में से एक जिला मुख्यालय के नयापारा में स्थित 11वीं शताब्दी का शिवलिंग, भगवान गणेश की मूर्तियां आज भी शोभायमान है। यहां की पहचान देशभर में कपिलेश्वर शिव मंदिर समूह एवं बावड़ी के रूप में होती है। वैसे यहां के स्मारक छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से संरक्षण प्राप्त है, लेकिन जनसेवा समिति के पदाधिकारी व सदस्य सुविधाएं जुटा रहे हैं।

मंदिर के इतिहास से युवा अनभिज्ञ
कपिलेश्वर मंदिर समूह के इतिहास से आज के युवा भी अनभिज्ञ है। वहीं पहले यहां हर महाशिवरात्रि पर कपिलेश्वर महोत्सव होता था। शासन-प्रशासन से कोई सहयोग नहीं मिलने के कारण तीन दिवसीय कपिलेश्वर महोत्सव का आयोजन भी बंद हो गया है। महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान कपिलेश्वर महादेव की पूजा होती है।

मंदिर में कई देवी-देवताओं की प्राचीन प्रतिमाएं
कपिलेश्वर मंदिर समूह में भगवान शिव, गणेश को समर्पित मंदिर है। कृष्ण, देवी दुर्गा, संतोषी और राम जानकी मंदिर भी है। भगवान शंकर को समर्पित कपिलेश्वर मंदिर सबसे बड़ा है। पूर्वाभिमुख इस मंदिर में सिर्फ गर्भगृह मात्र है। मंदिर का शिखर काफी ऊंचा है। दोनों तरफ भगवान गणेश की 6 फीट की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर द्वार के दाएं और बाएं तरफ कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

जल कुंड का पानी कभी नहीं सूखता
कपिलेश्वर जनसेवा समिति के सदस्य चेतन नागवंशी ने बताया कि यहां शिव मंदिर के सामने एक कुंड है। जहां हमेशा पानी भरा रहता है। जो कभी नहीं सूखता। मेरी जानकारी में तो सूखा ही नहीं है। कई योद्धाओं की प्रतिमा स्तंभों पर स्थापित हैं।

हर दरवाजे के ऊपर गणेश की मूर्तियां
शिवलिंग, राजा-रानी की मूर्तियां 11वीं से 14वीं शताब्दी का है। प्रत्येक मंदिर के दरवाजे के ऊपर गणेश की मूतियां अंकित है। मंदिरों के शिखर भाग पर नागों की आकृतियां अंकित है। अनुमान है कि यहां पर भी स्थानीय नागवंशी राजाओं का शासन रहा होगा। किवंदती है कि इनके शासन काल में ही इन मंदिरों का निर्माण होना माना गया है। यहां भगवान राम का मंदिर गर्भगृह और मंडप में विभक्त है।

महाशिवरात्रि पर 1008 दीप से होगी आरती
मंदिर समिति के मुताबिक शनिवार को भगवान शंकर की विशेष पूजा होगी। वहीं भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा कराई जाएगी। वहीं कांवडि़ए जिला मुख्यालय के रामघाट से जल लाकर भगवन कपिलेश्वर महादेव को अर्पित करेंगे। वहीं देर शाम को विश्व जागृति मिशन 1008 दीए जलाकर भगवान की विशेष आरती करेगा।

Published on:
17 Feb 2023 11:10 pm
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