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एपवा ने शुरू किया स्वास्थ्य, शिक्षा व शौचालय अभियान

आजादी के इतने वर्षों बाद भी अधिकांश लोंगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और शौचालय की सुविधा नहीं मिली है
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 6 Sep 2018, 4:49 PM IST

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एपवा ने शुरू किया स्वास्थ्य, शिक्षा व शौचालय अभियान

बेंगलूरु. अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संगठन (एपवा) की ओर से राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत बुधवार को सभी को स्वास्थ्य, शिक्षा और शौचालय की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए अभियान शुरू किया गया। यहां भी जिला एपवा कमिटी की ओर से मैसूरु बैंक सर्कल के पास अभियान के तहत सभा का आयोजन किया गया।

सभा में एपवा की नेता निर्मला ने कहा कि संविधान में देश के सभी नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता और बंधुता का बराबरी का अधिकार दिया गया है। लेकिन आजादी के इतने वर्षों बाद भी अधिकांश लोंगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और शौचालय की सुविधा नहीं मिली है। सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं का नारा दे रही है, लेकिन देश में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। बेटी बचाने के लिए जरूरी है कि उसे शिक्षा के जरिये सशक्त बनाया जाए, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं और गांव स्तर तक सभी के लिए शौचालय की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि इसीलिए एपवा ने यह अभियान शुरू किया है। इस अवसर पर लेखा, अपन्ना, बी विनय कुमार सहित कई वक्ताओं ने विचार व्यक्क्त किए। सभा में बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं।


मजदूर-किसान रैली के समर्थन में धरना
मैसूरु. सीआइटीयू, एआइकेएस और एआइएडब्ल्यूयू के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को यहां धरना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह धरना दिल्ली में संसद भवन के सामने चल रहे मजदूर-किसान रैली के समर्थन में दिया गया। आंदोलन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि केन्द्र सरकार की नीतियों के कारण प्रतिदिन मजदूरी कर आजीविका चलाने वाले और अन्य मजदूरों का जीवन प्रभावित हुआ है।

सरकार की नीतियों से मात्र 0.1 प्रतिशत जनसंख्या को लाभ हुआ है। आम लोगों को कोई फायदा नहीं पहुंचा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि केन्द्र सरकार कारपोरेट घरानों के हित में काम कर रही है। सरकार ने बड़े-बड़े कारपोरेट घरानों के ढाई लाख करोड़ रुपए ऋण माफ कर दिए हैं। सरकार की नीतियों से मजदूरों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। मालिकों के पक्ष में श्रम कानूनों का संशोधन किया जा रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। अब तक डाक्टर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की गई है।

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