10 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मानव मिशन से पहले एलइओ में होंगे 10 प्रयोग

रोग को मिटाने के लिए प्रेम को दवा के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए।

2 min read
Google source verification
jainism

मानव मिशन से पहले एलइओ में होंगे 10 प्रयोग

बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोडवाड़ भवन में मंगलवार को रविंद्र मुनि ने मंगलाचरण से धर्मसभा की शुरुआत की। रमणीक मुनि ने ओमकार का सामूहिक उच्चारण कराया।

उन्होंने कहा कि आत्मा को परमात्मा कहा गया है, हम भी परमात्मा बन सकते हैं। यह मेरी भावना सिखाती है। इस रचना को समस्त आगमों का सार बताते हुए कहा कि शास्त्र, वेद पुराणों का सार भी है तो पूरी आध्यात्मिकता के रस से ओतप्रोत है।

इसका पान मैत्री व प्रेम से ही किया जा सकता है। अमृत के रसास्वादन को मैत्री भाव के बगैर अनुभूति नहीं किया जा सकता है। जिन्हें आगम पढऩा नहीं आता वे मेरी भावना पढ़कर आत्मामय बन सकते हैं।

सीधे सरल सपाट शब्दों की रचना को आसानी से समझा जा सकता है। जरूरत है इसे एकाग्र, मस्ती व भक्ति में होकर पढऩे की। मोह को जहर, प्रेम को अमृत बताते हुए मुनि ने कहा प्रेम का अनुभव करना है तो वह मोह के साथ नहीं हो सकता।

मोह और प्रेम के अंतर को विस्तार से परिभाषित करते हुए मुनि ने कहा प्रेम को आत्मा की संपदा बताया गया है तथा मोह मन की दौलत है। संसार की वस्तु व मस्तिष्क की उपज है।

उन्होंने कहा संसार बढ़ाना है तो मोह करें, घटाना है तो प्रेम करना चाहिए। मोह में भेदभाव बढ़ता है प्रेम है यह घटता है।

प्रेम को सद्भाव, स्वभाव एवं समभाव से परिभाषित करते हुए मुनि ने कहा मोह में स्वार्थ भी रहता है। मोह रोग व प्रेम औषधि है। रोग को मिटाने के लिए प्रेम को दवा के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए।

इस दौरान उन्होंने सत्यवादी राजा हरीशचंद्र की कथा की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने बताया कि कथा की पूर्णाहुति गुरुवार को होगी।

चिकपेट शाखा के महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने बताया कि इस मौके पर पारसमुनि ने मांगलिक प्रदान की। युवा संत ऋषिमुनि ने स्तवन गीतिका प्रस्तुत की।