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गंभीर जल संकट से जूझ रहा बेंगलूरु, प्रभावी जल प्रबंधन की जरूरत : कुलपति प्रो. रमेश

-जल, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कभी झीलों का शहर कहलाने वाला बेंगलूरु Bengaluru आज गंभीर जल संकट water crisis का सामना कर रहा है। जल प्रबंधन के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर उसे सख्ती से लागू करने की तत्काल आवश्यकता है। यह बात डॉ. मनमोहन सिंह बेंगलूरु सिटी यूनिवर्सिटी Bengaluru […]

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जल प्रबंधन के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर उसे सख्ती से लागू करने की तत्काल आवश्यकता।

सेंट्रल कॉलेज परिसर के ज्ञान ज्योति सभागार में जल, ऊर्जा, पर्यावरण और स्वास्थ्य संरक्षण पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित।

-जल, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

कभी झीलों का शहर कहलाने वाला बेंगलूरु Bengaluru आज गंभीर जल संकट water crisis का सामना कर रहा है। जल प्रबंधन के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर उसे सख्ती से लागू करने की तत्काल आवश्यकता है। यह बात डॉ. मनमोहन सिंह बेंगलूरु सिटी यूनिवर्सिटी Bengaluru City University के कुलपति प्रो. रमेश बी. ने सोमवार को कही। वे सेंट्रल कॉलेज परिसर के ज्ञान ज्योति सभागार में आयोजित जल, ऊर्जा, पर्यावरण और स्वास्थ्य संरक्षण पर आधारित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में अध्यक्षीय भाषण दे रहे थे। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ियों के हित में सतत विकास पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए।

सरकार व सार्वजनिक संस्थानों की बड़ी जिम्मेदारी

प्रो. रमेश ने कहा कि पानी केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और आजीविका का आधार है। इसके महत्व की उपेक्षा और दुरुपयोग ने आज एक बेहद खतरनाक स्थिति पैदा कर दी है। सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना, पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना और जन स्वास्थ्य की रक्षा करना सरकार व सार्वजनिक संस्थानों की बड़ी जिम्मेदारी है। इस दिशा में विश्वविद्यालय सक्रिय सहयोग के लिए तैयार है।

जल सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण

सम्मेलन के मुख्य अतिथि और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. टी. जी. सीताराम ने अपने संबोधन में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन और अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग के लिए व्यापक योजनाएं लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जैसे खाद्य सुरक्षा आवश्यक है, वैसे ही जल सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसके साथ ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण सतत विकास की नींव हैं।

जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव

सम्मेलन के तकनीकी अध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ. ए. नारायणस्वामी ने कहा कि जल और ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दे पूरी दुनिया को परेशान कर रहे हैं। प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग और पर्यावरण प्रदूषण ने जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है, इसलिए मानव अस्तित्व को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी कार्यक्रमों की आवश्यकता है।सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. बी. आर. सुप्रीत ने स्वागत भाषण दिया। सम्मेलन में शिकागो स्थित डब्ल्यूडब्ल्यूएम इंटरनेशनल के प्रतिनिधिमंडल सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।