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रेशम उत्पादन उद्योग के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाएं

उन्होंने वैज्ञानिकों और उद्योग के साझेदारों का आह्वान किया कि...

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रेशम उत्पादन उद्योग के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाएं

बेेंगलूरु. केन्द्रीय रेशम बोर्ड की ओर से यहां आयोजित कार्यशाला में रेशम उत्पादन व इसके बाइ प्रोडक्ट (गौण उत्पादन) की उपयोगिता तथा विविधता पर गंभीर चर्चा की गई।

कार्यशाला में बोर्ड के सदस्य सचिव रंजीत रंजन ओखंदियार ने रेशम उत्पादन उद्योग के बाइ प्रोडक्ट की उपयोगिता की आर्थिक महत्ता की जानकारी दी।

उन्होंने वैज्ञानिकों और उद्योग के साझेदारों का आह्वान किया कि आपस में बेहतर समन्वय स्थापति करें तथा गौण उत्पादों के वाण्िज्यिक उपयोग के बारे में समयबद्ध कार्ययोजना बनाएं।

कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे गुलबर्गा विश्वविद्यालय के उप कुलपति डॉ. एसआर निरंजन ने कहा कि रेशम बोर्ड के लिए यह उचित होगा कि गौण उत्पादों की विविधता, उसके पेटेंट और वाणिज्यीकरण पर शोध कार्य में तेजी लाए।

उन्होंने कहा कि लागत और मुनाफा के अनुपात को ध्यान में रखते हुए तकनीकी विकसित करने की भी जरूरत है।

बोर्ड चेयरमैन केएम हनुमंतरयप्पा ने कहा कि रेशम अपशिष्ट का हर स्तर पर उपयोग करने की विद्या का पालन कर साझेदारों को फायदा पहुंचाया जा सकता है। वर्तमान में चकरी के रेशम अवशिष्ट का निर्यात दूसरे देशों में किया जाता है।

उन्होंने वैज्ञानिकों व उद्यमियों का आह्वान किया कि इस संबंध में गंभीरता से सोचें और अपनी विशेषज्ञता का भरपूर उपयोग करें।

कार्यशाला में 80 लोगों ने भाग लिया। इसमें आइआइटी, नईदिल्ली और खडग़पुर, मुंबई कपड़ा उद्योग, राष्ट्रीय पशुपालन संस्थान, हेल्थ लाइन प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलूरु, धारवाड़ सहित अन्य संस्थानों के विशेषज्ञ मौजूद थे।