
संवेग भाव को अपनाएं
बेंगलूरु. हनुमंतनगर जैन स्थानक में साध्वी सुप्रिया ने शुक्रवार को प्रवन में उत्तराध्ययन सूत्र पर विवेचन करते हुए कहा कि मोक्ष ही परम सुख शांति का स्थान है। साधना का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है।
हमारा यही प्रतिदिन मनोरथ चिंतन करें कि हे प्रभु, मेरे भी जल्दी जल्दी कर्म नष्ट होकर मैं भी परम पद मुक्ति मोक्ष मंजिल को प्राप्त करूं। प्रभु महावीर ने मोक्ष में जाने की तीव्र अभिलाषा इच्छा रखने को संवेग कहा है।
साध्वी ने कहा कि यदि लक्ष्य निर्धारित हो तो देर सवेर यात्री को मंजिल की प्राप्ति अवश्य ही होती है।
राजा उदायन पौषधशाला में चिंतन करते हैं कि यदि प्रभु भगवान महावीर मेरी नगरी में पधारे तो मैं सब राज वैभव सुख साधनों को छोड़कर भगवान के चरणों में दीक्षित संयम अंगीकार करके अपना आत्म कल्याण करते हुए जन्म मरण के बंधन से मुक्त होकर संवेग भावों के साथ परम मद मुक्ति मोक्ष स्थान को प्राप्त करूं।
साध्वी ने सामायिक, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय का लाभ बताते हुए प्रतिदिन इनकी नियमित साधना आराधना करने की प्रेरणा दी।
साध्वी सुविधि ने उत्तराध्ययन सूत्र का वांचन किया। साध्वी सुमित्रा ने मंगलपाठ प्रदान किया। संचालन सहमंत्री सुरेश कुमार धोका ने किया।
Published on:
03 Nov 2018 06:54 pm
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