
बेंगलूरु. राज्य सरकार ने कर्नाटक व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश का विनियमन और शुल्क निर्धारण) अधिनियम, 2006 के नियमों के अनुसार राज्य के सभी डीम्ड-टू-बी मेडिकल विश्वविद्यालयों में स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों की बढ़ी हुई सीटों में से 25 फीसदी को सरकारी कोटे की सीटों के रूप में आरक्षित करने का निर्णय लिया है।
चिकित्सा शिक्षा के प्रधान सचिव ने डीम्ड-टू-बी मेडिकल विश्वविद्यालयों के प्रबंधन के साथ दो बैठकें कीं। सूत्रों के अनुसार, उनमें से अधिकांश ने सरकारी कोटे की सीटें देने पर सहमति जताई है। कर्नाटक में सरकारी और निजी 70 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें नौ डीम्ड-टू-बी मेडिकल विश्वविद्यालय शामिल हैं। शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के लिए इनमें यूजी पाठ्यक्रमों की 12,095 सीटें हैं। डीम्ड-टू-बी मेडिकल विश्वविद्यालयों में कुल 1,650 सीटें उपलब्ध हैं।
डीम्ड-टू-बी मेडिकल यूनिवर्सिटी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से निर्धारित मानदंडों के अनुसार काम कर रही हैं, जबकि अन्य सभी सरकारी और निजी कॉलेज राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरजीयूएचएस) के दायरे में हैं।
वर्तमान में, सीट शेयरिंग सिस्टम के अनुसार 40 फीसदी मेडिकल सीटें सरकारी कोटे के लिए, 40 फीसदी निजी प्रबंधन कोटे के लिए, 15 फीसदी गैर आवासीय भारतीय (एनआरआई) कोटे के तहत और 5 फीसदी प्रबंधन कोटे के लिए हैं। आरजीयूएचएस के तहत सभी निजी कॉलेज सरकारी कोटे के तहत 40 फीसदी सीटें दे रहे हैं। हालांकि, अधिकांश डीम्ड-टू-बी मेडिकल यूनिवर्सिटी सरकारी कोटे की सीटें नहीं दे रही थीं। वे इस आधार पर सरकारी कोटे की सीटें देने से इनकार कर रहे थे कि वे यूजीसी नियमों से बंधे हैं, न कि राज्य सरकार और आरजीयूएचएस के नियमों से। इसलिए, उन्हें स्वीकृत सभी सीटें निजी कोटे, एनआरआई और प्रबंधन कोटे की सीटों के रूप में भरी गईं।
कर्नाटक व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश का विनियमन और शुल्क निर्धारण) अधिनियम, 2006 (पीजीईटी नियम 2006-24) के अनुसार, यूजीसी नियमों का पालन करने वाले डीम्ड-टू-बी मेडिकल विश्वविद्यालयों को अपने कॉलेजों को आवंटित कुल सीटों में से 25 फीसदी सरकारी कोटे के तहत देनी चाहिए।
हर साल मेडिकल कॉलेजों को केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को आवश्यकता प्रमाण पत्र और व्यवहार्यता प्रमाण पत्र जमा करना होता है। राज्य सरकार संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं, डॉक्टरों की संख्या और नियमों के अनुपालन की पूरी जांच करने के बाद मेडिकल कॉलेजों को आवश्यकता प्रमाण पत्र और व्यवहार्यता प्रमाण पत्र जारी करेगी। सूत्रों ने बताया कि अगर डीम्ड-टू-बी मेडिकल यूनिवर्सिटी नियमों के अनुसार सरकारी कोटे की सीटें उपलब्ध नहीं कराती हैं, तो राज्य सरकार आवश्यकता प्रमाण पत्र और व्यवहार्यता प्रमाण पत्र जारी नहीं करेगी।
Published on:
10 Aug 2024 01:03 am
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