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बेंगलूरु।देश की संचार व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले इनसैट और जीसैट श्रृंखला के अत्याधुनिक उपग्रहों के विकास की बुनियाद 19 जून 1981 को तब पड़ी थी जब पहले स्वदेशी संचार उपग्रह 'एप्पलÓ का प्रक्षेपण हुआ था। इसी उपग्रह ने इसरो को संचार उपग्रहों के निर्माण, प्रक्षेपण के बाद उनके निंयत्रण और परिचालन से लेकर लाइव प्रसारण का क,ख,ग.. सिखाया। इसी उपग्रह के जरिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लालकिले से 15 अगस्त 1981 को राष्ट्र का सम्बोधन लाइव प्रसारित किया गया। स्वदेशी संचार उपग्रहों के जरिए लाइव प्रसारण के सफर की शुरुआत यहीं से हुई। देश की संचार व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव की नीव रखने वाले एप्पल उपग्रह प्रक्षेपण के 35 साल पूरा होने पर इसरो ने उसे याद किया है।
इसरो ने कहा है कि एप्पल का प्रक्षेपण देश के संचार तंत्र को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। इसकी डिजाइनिंग एवं विकास एक सैंडविंच पैसेंजर के रूप में की गई थी। दरअसल, एरियन-1 का पहला पे-लोड मेटियोसैट था जिसे सबसे ऊपर इंटीग्रेट किया गया था जबकि सबसे नीचे सीएटी (कैप्सूल एरियन टेक्नोलॉजिक) था। बीच में एप्पल को रखा गया था। पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किए जाने के बाद इस संचार उपग्रह को भू-स्थैतिक कक्षा (जीएसओ) में पहुंचाने के लिए इसरो ने स्वदेशी प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 के चौथे चरण पर आधारित अपने एपोगी मोटर तकनीक का उपयोग किया।
देश के इस पहले संचार उपग्रह की खासियत यह थी कि इसे सीमित संसाधनों से औद्योगिक शेड में तैयार किया गया। इसरो ने महज 2 साल में इस उपग्रह को बनाया था। इसमें पहली बार इसरो को तीन अक्ष वाले संचार उपग्रह तैयार करने का अनुभव प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उपग्रहों को कक्षा में उठाने, उपग्रहों के मैनुवर और सुधार आदि की शुरुआत हुई। इस उपग्रह के प्रक्षेपण के बाद संचार सेवाओं में नई शुरुआत हुई।
टीवी और रेडियो नेटवर्किंग कार्यक्रमों के प्रसारण में एप्पल का उपयोग हुआ। इसरो ने कहा है कि ऑपरेशनल संचार उपग्रहों के स्दवेशी विकास की नींव एप्पल से पड़ी थी। उसी नींव का विस्तार आज इनसैट और जीसैट शृंखला के उपग्रह हैं। इन उपग्रहों ने आज देश की प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। टेली-एजुकेशन, टेली-मेडिसिन, विलेज रिसोर्स सेंटर (वीआरसी), आपदा प्रबंधन प्रणाली जैसे अनुप्रयोगों की पहुंच आम आदमी तक हुई और अंतरिक्षीय तकनीक का लाभ आम आदमी को मिलने लगा।
लाइव प्रसारण की शुरुआत
13 अगस्त 1981 को तत्तकालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एप्पल उपग्रह राष्ट्र को समर्पित किया गया। तब इंदिरा गांधी ने संचार मंत्री को एप्पल का मॉडल सौंपते हुए कहा था कि यह 'भारत के संचार उपग्रहों के युग का नया सवेरा है।Ó भारतीय डाक एवं टेलीग्राफ विभाग ने 19 जून 198 2 को एप्पल प्रक्षेपण के एक साल पूरा होने पर एक डाक टिकट भी जारी किया। एप्पल पर ही प्रयोग कर इसरो ने उन्नत संचार उपग्रहों की डिजाइनिंग, फैब्रिकेशन, प्रक्षेपण, प्रक्षेपण के उपरांत मैनुवर, भू-स्थैतिक कक्षा में उपग्रह के रखरखाव आदि में विशेषज्ञता हासिल की। इस उपग्रह ने लगभग दो वर्षों तक देश को सेवाएं दी। इसे 19 सितंबर 1983 को निष्क्रिय कर दिया गया। हालांकि, यह सिर्फ एक सी-बैंड ट्रांसपोंडर वाला उपग्रह था मगर तकनीकी विकास और संचार उपग्रहों के ऑपरेशनल अनुभवों के लिहाज से एप्पल ने इनसैट प्रणाली के उपग्रहों की नींव डाली।
राजीव मिश्रा.
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